नईदिल्ली (18 दिसंबर 24)। भारत में चुनावों की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर से चर्चा का विषय बने 'एक देश-एक चुनाव' की परिकल्पना को लेकर मंगलवार को संसद में एक अहम कदम उठाया गया। सरकार ने संसद में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2024 पेश किए। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ किए जाएं, जिससे चुनावों में होने वाले खर्च और संसाधनों का कुशल उपयोग हो सके। जैसे ही यह विधेयक लोकसभा में पेश हुआ, हंगामे का माहौल बन गया। लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने विधेयक को पेश किया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इस पर विरोध जताया। इस विधेयक के पक्ष में और विपक्ष में तीखी बहस हुई, और बाद में डिवीजन के बाद इसे सदन में पेश किया गया। इसके बाद विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया।
विपक्षी दलों ने 'एक देश-एक चुनाव' विधेयक पर कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने संविधान संशोधन विधेयक को संविधान के मौलिक ढांचे और संघीय संरचना के खिलाफ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान की सातवीं अनुसूची का उल्लंघन करता है और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है। लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने भी इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए राष्ट्रपति को अत्यधिक शक्तियां दी जा रही हैं, जो असंवैधानिक हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी इस विधेयक पर अपनी आपत्ति जताई। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस विधेयक का विरोध किया। टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने भी इस विधेयक को संविधान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। वहीं, कुछ दलों ने इस विधेयक का समर्थन भी किया। शिवसेना (शिंदे गुट) और तेलुगु देशम पार्टी ने इसके पक्ष में अपनी राय दी।