Tuesday, 06 Oct 2026

'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते': भारत

क्वालालंपुर (03 जून 25)। मलेशिया की यात्रा पर पहुंचे सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की भारत की नीति पर जोर देते हुए कहा कि 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।' कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोमवार को यह जानकारी दी। उच्चायोग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मलेशिया में प्रधानमंत्री के विभाग (कानून एवं संस्थागत सुधार) में उप मंत्री वाईबी एम. कुला सेगरन के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी और ‘पार्टी केदिलन राक्यत इन मलेशिया' के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण और राष्ट्रीय संकल्प से अवगत कराया।

पोस्ट के मुताबिक, 'चर्चा ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया पर केंद्रित थी। आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की भारत की नीति पर जोर दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।' प्रतिनिधिमंडल की यह प्रतिक्रिया पहलगाम आतकंवादी हमले के बाद भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित करने के सिलसिले में थी। नयी दिल्ली ने दो टूक कहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को शह देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई इस संधि में सिंधु और इसकी पांच सहायक नदियों-सतलुज, व्यास, रावी, झेलम और चिनाब- के पानी के इस्तेमाल के लिए दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच जल बंटवारे और सूचनाओं के आदान-प्रदान के खाके को परिभाषित किया गया है। उच्चायोग ने बताया कि संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने वाईबी सिम त्जे त्जिन के नेतृत्व वाले पार्टी केडिलन राक्यत के प्रतिनिधिमंडल के साथ 'रचनात्मक वार्ता' की। एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने के भारत के सिद्धांतबद्ध और अडिग रुख को रेखांकित किया।

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