फरीदाबाद (17 जुलाई 24)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने फरीदाबाद स्थित 'ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट' (टीएचएसटीआई) के तत्वावधान में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्रीय केंद्र में महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन (सीईपीआई) के तहत एशिया की पहली स्वास्थ्य अनुसंधान से संबंधित 'प्री-क्लीनिकल नेटवर्क सुविधा' का उद्घाटन किया।
महामारी तैयारी नवाचारों के लिए गठबंधन (सीईपीआई) ने बीएसएल3 रोगजनकों को संभालने के लिए अपनी क्षमता के आधार पर बीआरआईसी-टीएचएसटीआई को प्री-क्लीनिकल नेटवर्क प्रयोगशाला के रूप में चुना है। यह विश्व में 9वीं ऐसी नेटवर्क प्रयोगशाला होगी जो पूरे एशिया में इस तरह की पहली प्रयोगशाला है। इस तरह की अन्य प्रयोगशालाएं अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं। प्रायोगिक पशु सुविधा देश की सबसे बड़ी छोटी पशु सुविधाओं में से एक है, जिसमें प्रतिरक्षा समझौता करने वाले चूहों, खरगोश, हैम्स्टर, गिनी सूअर आदि की प्रजातियों सहित लगभग 75,000 चूहों को रखने की क्षमता है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान एवं विकास के लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योगों को माइक्रोबियल कल्चर प्रदान करने के उद्देश्य से एक 'भंडार' के रूप में कार्य करने के लिए 'आनुवंशिक रूप से परिभाषित मानव संबद्ध माइक्रोबियल संस्कृति संग्रह (जी-ह्यूमिक) सुविधा' का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा एक नोडल संसाधन केंद्र के रूप में काम करेगी। इससे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और उद्योग के बीच राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह देश के शोधकर्ताओं के उपयोग के लिए आनुवंशिक रूप से विशेषता वाले विशिष्ट रोगज़नक़-मुक्त जानवरों (क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण और शुक्राणु सहित) के भंडार के रूप में भी काम करेगा।