Friday, 09 Oct 2026

'सिटी फॉरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान वन अधिनियम में नहीं: HC

इंदौर (12 सितंबर 25)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने ओमप्रकाश जोशी एवं अन्य बनाम राज्य शासन एवं अन्य प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए हुकुमचंद मिल प्रांगण को 'सिटी फॉरेस्ट' घोषित करने एवं वहाँ की हरियाली को न काटने संबंधी याचिका को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि हुकुमचंद मिल की भूमि वर्ष 1992 से बंद मिल की है और मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा 421 करोड़ रुपये की राशि अदा कर इस भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिससे मिल मजदूरों तथा अन्य सभी बकाया का भुगतान किया जा चुका है। उस समय किसी भी याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी और अब इतनी भारी राशि चुकाने के बाद हाउसिंग बोर्ड का विकास का अधिकार छीना नहीं जा सकता। 

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 'सिटी फॉरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान वन अधिनियम में नहीं है और राज्य शासन द्वारा पहले से ही इंदौर के कनाडिया क्षेत्र में एक लाख पौधे लगाकर सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा जारी की गई ई-निविदा केवल झाड़ियों और झाड़-झंखाड़ हटाने हेतु है तथा उसमें कहीं भी पेड़ काटने जैसा कोई उल्लेख नहीं है। इस पूरे प्रकरण में शासन का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी द्वारा रखा गया। न्यायालय के इस आदेश से हुकुमचंद मिल प्रांगण के विकास का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है और अब इस संबंध में किसी भी प्रकार की बाधा शेष नहीं है।

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