नईदिल्ली (02 फरवरी 26)। केंद्रीय बजट 2026-27 से मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स में सीधी राहत की थी। हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन सरकार ने टैक्स सिस्टम को आसान और कम डरावना बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। जोर इस बात पर है कि ईमानदार करदाता तकनीकी भूल या जटिल नियमों की वजह से न तो परेशान हों और न ही कानूनी पचड़ों में फंसें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस कानून का मकसद टैक्स फाइलिंग को सरल बनाना, मुकदमेबाजी घटाना और छोटे मामलों में जेल जैसी सख्त कार्रवाई से बचाना है।
NRI के लिए प्रॉपर्टी बेचना हुआ आसान- बजट में एनआरआई के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब भारत में संपत्ति बेचने के दौरान एनआरआई को टीडीएस के लिए अलग से TAN लेने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी खरीदने वाला भारतीय खरीदार ही टीडीएस काटेगा और उसे अपने PAN के जरिए सरकार के पास जमा करेगा। इससे एनआरआई के लिए प्रक्रिया सरल होगी और अतिरिक्त कागजी कार्रवाई खत्म होगी।
विदेशी संपत्ति के खुलासे में राहत- बजट 2026 में विदेशी आय और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी नरमी दिखाई गई है। कई बार करदाता जानबूझकर नहीं, बल्कि जानकारी की कमी के कारण विदेश में रखी छोटी संपत्तियों का खुलासा नहीं कर पाते। अब यदि किसी एनआरआई की विदेश में रखी गैर-अचल संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और उसका खुलासा नहीं हुआ है, तो उस पर कोई दंड या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह राहत 1 अक्टूबर 2024 से लागू मानी जाएगी।
छुपी आय वालों के लिए सेटलमेंट का रास्ता- जिन एनआरआई ने न तो विदेशी आय और न ही संपत्ति की जानकारी दी है, उनके लिए सरकार ने एक सेटलमेंट विकल्प दिया है। ऐसे मामलों में 1 करोड़ रुपये तक की छुपी आय या संपत्ति पर 30 प्रतिशत टैक्स और अतिरिक्त 30 प्रतिशत शुल्क देकर पूरा मामला निपटाया जा सकता है। इसके बाद कोई जुर्माना या मुकदमा नहीं चलेगा। वहीं जिन्होंने विदेशी आय तो बताई है, लेकिन संपत्ति घोषित नहीं कर पाए, उनके लिए 5 करोड़ रुपये तक की सीमा तय की गई है। ऐसे मामलों में केवल 1 लाख रुपये का शुल्क देकर पूरी कानूनी राहत मिलेगी।तकनीकी गलतियों पर अब जेल नहीं नए टैक्स नियमों में सबसे बड़ा बदलाव ‘डिक्रिमिनलाइजेशन’ की दिशा में है। अब अकाउंट्स का ऑडिट न कराना, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट न देना या जानकारी देने में चूक जैसी तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है। ऐसे मामलों में अब जेल की बजाय मामूली शुल्क लिया जाएगा. यहां तक कि दस्तावेज न देना या वस्तु के रूप में भुगतान पर टीडीएस न काटना भी अब आपराधिक मामला नहीं माना जाएगा।सरकार ने टैक्स विवाद कम करने के लिए कई प्रक्रियात्मक बदलाव किए हैं। अपील के दौरान जुर्माने पर ब्याज नहीं लगेगा। अपील के लिए अग्रिम जमा राशि 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है। पुनर्मूल्यांकन के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका मिलेगा, जिसमें 10 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा।
जेल की सजा लगभग खत्म, जुर्माने पर जोर- नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत अब छोटे मामलों में केवल जुर्माना लगेगा। गंभीर मामलों में भी अधिकतम सजा घटाकर 2 साल कर दी गई है, जिसे अदालत जुर्माने में बदल सकती है। पहले ऐसे मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान था। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और इसे ईमानदार करदाताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।