Tuesday, 29 Sep 2026

अब मदरसे में सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई, नहीं मिलेगी डिग्री

लखनऊ (06 अगस्त 26)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। अब यूपी के मदरसे BA और MA की डिग्री नहीं दे पाएंगे। मदरसों से निकलकर हायर एजुकेशन की चाहत रखने वाले छात्रों को अब सामान्य विश्वविद्यालयों में ही दाखिला लेना पड़ेगा। इसे लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

दरअसल, उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्य मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से कामिल और फाजिल डिग्रियां प्रदान करने को 'असंवैधानिक' घोषित किए जाने के मद्देनजर मदरसा नियमावली में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव को योगी सरकार ने मंजूरी दे दी। अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा कामिल और फाजिल की डिग्रियां प्रदान किए जाने को यूजीसी अधिनियम के खिलाफ और असंवैधानिक करार दिया था, जिसके मद्देनजर मदरसा नियमावली में भी संशोधन जरूरी था।

अंसारी ने बताया कि आज मंत्रिमंडल ने नियमावली में इसी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि अब मदरसों में उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रमों के रूप में मुंशी, मौलवी और आलिम की ही पढ़ाई होगी। उन्होंने बताया कि पहले कामिल और फाजिल की डिग्रियों के आधार पर विभिन्न मदरसों में शिक्षक के पद पर तैनात लोगों की नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह निर्णय उच्चतम न्यायालय का आदेश आने के बाद से लागू किया जाएगा। इस सवाल पर कि यह संशोधन करने में इतना वक्त क्यों लग गया, राज्य मंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में लिखा-पढ़ी में वक्त लगता है।

प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने संवाददाताओं से कहा कि अगर मदरसों ने कामिल और फाजिल पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए यूजीसी से मान्यता नहीं ली हैं तो उन्हें फर्जी ही समझा जाएगा। इस बारे में दानिश अंसारी ने बताया कि मदरसों को अपने यहां कामिल और फाजिल पढ़ाने के लिए किसी विश्वविद्यालय से संबद्धता लेनी होती है, लेकिन अभी उत्तर प्रदेश में इस बारे में सरकार ने कोई नियमावली नहीं बनाई है। उच्चतम न्यायालय ने नवंबर 2024 में अपने एक आदेश में उत्तर प्रदेश राज्य मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा अपने सम्बद्ध मदरसों में छात्रों को कामिल और फाजिल की डिग्री दिए जाने को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी अधिनियम के विरुद्ध बताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था।


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