गुवाहाटी (28 नवंबर 25)। असम विधानसभा ने गुरुवार को बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला ऐतिहासिक विधेयक पारित कर दिया। नए कानून के तहत बहुविवाह को आपराधिक कृत्य माना जाएगा और दोषी को अधिकतम 10 साल की कैद तथा पीड़ित को 1.40 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है। यह कदम राज्य में महिला सुरक्षा और समान अधिकारों की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस कानून के लागू होने के बाद असम में एक से ज्यादा विवाह करना एक अपराध माना जाएगा। यह फैसला असम को UCC की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। सामान्य तौर पर बहुविवाह के दोषी को 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माना। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो सजा बढ़कर 10 वर्ष की कैद और जुर्माना हो जाएगा।
इस कानून का उल्लंघन करने वाले दोषी व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है। ऐसा मामला सामने आने पर पीड़िता (जिसके खिलाफ बहुविवाह किया गया हो) को मुआवज़े के लिए 1.40 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी प्रावधान है। विधेयक पर चर्चा के दौरान असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम बताया। उन्होंने कहा- 'बहुविवाह विरोधी अधिनियम असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड की ओर पहला कदम है।' सीएम सरमा ने यह भी घोषणा की कि अगर उनकी पार्टी असम में दोबारा सत्ता में आती है, तो वे पहले सत्र में ही राज्य में यूसीसी लागू करेंगे। विधेयक में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय और छठी अनुसूची के क्षेत्रों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। असम सरकार का दावा है कि यह निर्णय संवैधानिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।