Sunday, 04 Oct 2026

आज महात्मा गांधी भी चुनाव लड़ें तो हार जाएं: मनोज झा

इंदौर (18 मई 26)। जाल सभागृह में अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित 66वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला का आयोजन रविवार को किया गया। इस दौरान प्रसिद्ध चिंतक, विचारक और सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि देश की राजनीति की भाषा इतनी बदल चुकी है कि यदि आज महात्मा गांधी भी चुनाव लड़ें तो संभव है कि वे हार जाएं। उन्होंने कहा कि आज राजनीति संवाद और विचारों से अधिक आक्रामकता तथा चुनावी गणना पर केंद्रित हो गई है।

झा ने कहा कि आज जनता प्रतिनिधि नहीं, बल्कि आक्रामक नेता पसंद करने लगी है। 'हम अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, कोई पहलवान नहीं'। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में भाषा का स्तर लगातार गिर रहा है और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ समाज भी जिम्मेदार है। पहले सार्वजनिक जीवन में अपशब्दों को गलत माना जाता था, लेकिन अब वही भाषा सामान्य होती जा रही है। चुनाव जीतने के लिए यदि भाषा को गिराना पड़े तो ऐसी राजनीति से बचना चाहिए। झा ने कहा कि देश के विभाजन के समय जो रेखा दो देशों के बीच खींची गई थी, वह अब समाज और मोहल्लों तक पहुंच गई है। शासन की आलोचना को देश की आलोचना मानना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि 'घुसपैठिए' और 'शहरी नक्सली' जैसे शब्दों का राजनीतिक उपयोग समाज को बांटने का काम कर रहा है। भाषा के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि हिंदी किसी सरकारी अभियान से नहीं, बल्कि लोकजीवन और जनसंपर्क से बड़ी भाषा बनी है। उन्होंने कहा 'राजनीति के लोग भाषा नहीं, मतदान यंत्र देखते हैं और भाषा को मतदान यंत्र नहीं दिखते'। कार्यक्रम में अतिथि स्वागत श्यामसुंदर यादव, रामबाबू अग्रवाल, अन्ना दुराई, इशाक चौधरी ने किया। संचालन मनीष भालेराव ने किया तथा आभार प्रदर्शन अरविंद तिवारी ने किया।

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