नईदिल्ली (28 जून 24)। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में एमएसएमई एक महत्वपूर्ण शक्ति होगी। अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस, ‘उद्यमी भारत’ के दिन भर के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में एक समावेशी और केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से इस दिशा में किये जा रहे प्रयास को और मज़बूत तथा व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मांझी ने कहा कि तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को डिजिटल और तकनीकी समाधानों को अपनाने के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार के चल रहे सुधारों के हिस्से के रूप में एमएसएमई क्षेत्र में कानूनी सुधार एक बल गुणक के रूप में काम करेंगे।
मांझी ने कहा कि छह स्तंभों की पहचान की गई है, जिन पर हमारे प्रयास आधारित होंगे- (i) औपचारिकीकरण और ऋण तक पहुंच (ii) बाजार तक पहुंच और ई-कॉमर्स को अपनाना (iii) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से उत्पादकता में वृद्धि (iv) सेवा क्षेत्र में कौशल स्तर में वृद्धि और डिजिटलीकरण (v) खादी, ग्राम और कॉयर उद्योग को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए समर्थन (vi) उद्यम निर्माण के माध्यम से महिलाओं, कारीगरों का सशक्तिकरण। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), अर्जुनराम मेघवाल ने सुधार के उन क्षेत्रों के बारे में बात की, जो एमएसएमई को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। मेघवाल ने कहा कि मोदी सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूत करने की दिशा में कानूनी सुधारों और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से 'कारोबार करने में सुगमता' और 'जीवन जीने में आसानी' सुनिश्चित कर रही है।