Thursday, 01 Oct 2026

आदिवासी को 'वनवासी' बताकर पहचान मिटाना चाहती है भाजपा

नईदिल्ली (27 मई 26)। आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैन विक्रांत भूरिया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आदिवासी समाज की जमीन, जंगल और संस्कृति पर'कॉरपोरेट लूट'का आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों के लिए आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। भूरिया ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 24 मई को भाजपा द्वारा आयोजित‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम' आदिवासी हितों के बजाय 'कॉरपोरेट लूट पर पर्दा डालने' का प्रयास था। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में अपेक्षा से बहुत कम लोग पहुंचे और कई लोगों को बहला-फुसलाकर लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हसदेव, सिजिमाली और ग्रेट निकोबार में आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन कॉरपोरेट परियोजनाओं के लिए छीने जा रहे हैं।

भूरिया ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत करोड़ों पेड़ काटे जाएंगे, जबकि वहां दुर्लभ शोम्पेन जनजाति निवास करती है और वह क्षेत्र यूनेस्को 'बायोस्फीयर रिजर्व' घोषित है। उन्होंने कहा कि भाजपा 'आदिवासी' शब्द की जगह 'वनवासी' शब्द को बढ़ावा देकर आदिवासियों की मूल पहचान कमजोर करना चाहती है क्योंकि 'आदिवासी इतिहास है, जबकि वनवासी एक राजनीतिक प्रोजेक्ट है।' भूरिया ने आरोप लगाया कि पेसा कानून और वन अधिकार कानून का सही पालन नहीं हो रहा है तथा आदिवासियों को नक्सली बताकर प्रताड़ति किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज भी कुपोषण, गरीबी और विस्थापन से सबसे अधिक प्रभावित है, जबकि सरकार बड़े बजट के दावे करती है।

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