नईदिल्ली (28 मई 24)। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित 'स्वच्छ और स्वस्थ समाज के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण' के राष्ट्रीय शुभारंभ में भाग लिया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व इतिहास और राष्ट्रों के इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हमेशा आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित रहे हैं। विश्व इतिहास इस बात का साक्षी है कि आध्यात्मिक मूल्यों की अवहेलना करके केवल भौतिक प्रगति का मार्ग अपनाना अंततः विनाशकारी साबित हुआ है। स्वस्थ मानसिकता के आधार पर ही समग्र कल्याण संभव है। एक सम्पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों आयामों से स्वस्थ्य होता है। ऐसे व्यक्ति एक स्वस्थ समाज, राष्ट्र और विश्व समुदाय का निर्माण करते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण ही वास्तविक सशक्तिकरण है। जब किसी धर्म या संप्रदाय के अनुयायी आध्यात्मिकता से भटक जाते हैं, तो वे कट्टरता के शिकार हो जाते हैं और अस्वस्थ मानसिकता से ग्रस्त हो जाते हैं। आध्यात्मिक मूल्य सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं।