इंदौर (15 अगस्त 26)। शहर के सुभाष नगर में सर्वेश कानूनगो के घर पर लगे पौधों में शुक्रवार रात दो 'ब्रह्म कमल' खिले। पौराणिक मान्यता के अनुसार 'ब्रह्म कमल' का खिलना बेहद शुभ माना जाता है। आमतौर पर उत्तराखंड की पहाड़ियों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ पौधे का मालवांचल में खिलना चमत्कृत करता है। इसलिए जैसे ही कानूनगो परिवार में पौधे से 'ब्रह्म कमल' प्रकट होने की सूचना लोगों को मिली, उनके घर पर इसके दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोगों ने श्रद्धा से 'ब्रह्म कमल' की पूजा-अर्चना भी की।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में इसे कौल पद्म नाम से जानते हैं। उत्तराखंड में ब्रह्म कमल की 24 प्रजातियां मिलती हैं। हालांकि पूरे विश्व में इसकी 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। ब्रह्म कमल के खिलने का समय जुलाई से सितंबर है। उत्तराखंड की फूलों की घाटी में, रूपकुंड की तलहटी में केदारनाथ में पिंडारी ग्लेशियर में यह पुष्प बहुतायत पाया जाता है। इस पुष्प का वर्णन वेदों में भी मिलता है। महाभारत के वन पर्व में इसे सौगंधिक पुष्प कहा गया है। जिस समय यह पुष्प खिलता है उस समय वहां का वातावरण सुगंध से भर जाता है।