Monday, 28 Sep 2026

इबोला का खतरा: भारतीय हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट

नईदिल्ली (27 मई 26)। कांगो और युगांडा जैसे अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस खतरनाक वायरस को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए विमानन कंपनियों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

संदिग्ध यात्रियों के लिए 'अलग' सीटिंग और SOP जारी- DGCA द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अब प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि यात्रा के दौरान कोई संदिग्ध मामला सामने आता है, तो एयरलाइंस को विमान के भीतर ही उनके लिए अलग बैठने की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह नियम मुख्य रूप से कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों पर लागू होंगे।

हेल्थ डिक्लेरेशन और आइसोलेशन के कड़े नियम- अनिवार्य घोषणा पत्र: प्रभावित देशों से यात्रा करने वाले हर यात्री को विमान में चढ़ने से पहले एक ‘स्वास्थ्य घोषणा पत्र’ भरना होगा। उड़ान के दौरान निगरानी: यदि उड़ान के दौरान किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण दिखते हैं, तो क्रू सदस्यों की जिम्मेदारी होगी कि उसे अन्य यात्रियों से अलग कर आइसोलेट करें। APHO को रिपोर्टिंग: जो यात्री किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या जिनमें लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें इमिग्रेशन क्लीयरेंस से पहले हवाई अड्डा स्वास्थ्य अधिकारी (APHO) को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की है और ICMR तथा NCDC जैसी प्रमुख एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली और हैदराबाद जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाओं पर निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यदि यात्रा के 21 दिनों के भीतर उन्हें लक्षण महसूस हों, तो तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी, सिरदर्द, दस्त या शरीर से असामान्य ब्लीडिंग की समस्या हो, तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने या लार जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से तेजी से फैलता है।

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