नईदिल्ली (15 अप्रैल 26)। भारत के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने ईरान और अमेरिका के बीच हालिया वार्ता में चीन की अहम लेकिन पर्दे के पीछे भूमिका पर बड़ा खुलासा किया है।उनके मुताबिक, यह एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है कि ईरान बातचीत की मेज पर आया। सोनी ने कहा कि भले ही इस्लामाबाद में हुई वार्ता में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन बातचीत का होना ही एक बड़ी सफलता है। विद्या भूषण सोनी का मानना है कि इतने संवेदनशील मुद्दों पर पहली ही बैठक में समझौता होना संभव नहीं होता और इसके लिए कई दौर की बातचीत जरूरी होती है।
सोनी ने बताया कि अमेरिका और ईरान दोनों 'मैक्सिमलिस्ट' यानी कठोर शुरुआती मांगों के साथ वार्ता में पहुंचे थे, जिन्हें स्वीकार करना आसान नहीं था। लेकिन असली बातचीत टेबल के पीछे, यानी अनौपचारिक बैठकों और साइडलाइन चर्चाओं में हुई। सोनी के अनुसार, इस वार्ता का सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) रहा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार और शिपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए हॉर्मुज़ उसका सबसे बड़ा 'बर्गेनिंग चिप' है, क्योंकि इस पर नियंत्रण रखकर वह अमेरिका पर दबाव बना सकता है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस जलमार्ग को खुलवाना उनकी रणनीतिक सफलता का पैमाना बन गया है। सोनी ने यह भी बताया कि 21 घंटे तक चली इस वार्ता ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, क्योंकि करीब 47-48 साल बाद इतने उच्च स्तर पर दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत हुई। हालांकि अभी भी कुछ प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है, लेकिन ईरान की ओर से यह स्वीकार करना कि कई बिंदुओं पर प्रगति हुई है, एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।