नईदिल्ली (19 मार्च 26)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत तेल और गैस सेक्टर की कंपनियों को अपने संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी नियमित रूप से सरकार को उपलब्ध करानी होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा 18 मार्च को जारी अधिसूचना के मुताबिक, 'पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026' लागू किया गया है। इसके दायरे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरी, एलएनजी आयातक, पाइपलाइन ऑपरेटर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर और पेट्रोकेमिकल कंपनियां शामिल हैं।
इन सभी को अब पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ को उत्पादन, आयात, खपत और भंडार से जुड़े आंकड़े तय अंतराल- कुछ मामलों में रोजाना- देने होंगे। इस आदेश के साथ पहले लागू गोपनीयता प्रावधानों को खत्म कर दिया गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी विदेशों से मंगाता है। संघर्ष से पहले इन आयातों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। लेकिन मौजूदा हालात में इस मार्ग के बाधित होने से आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि सरकार ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन गैस और एलपीजी के मामले में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खाड़ी देशों से आपूर्ति कम होने के कारण औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित गैस मिल रही है, जिससे कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है।