Wednesday, 30 Sep 2026

एआई और सैटेलाइट से खुली 7000 करोड़ की टैक्स चोरी

उदयपुर (09 मार्च 26)। देशभर में पहली बार आयकर विभाग ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त में बड़े स्तर पर टैक्स चोरी का मामला पकड़ा है। विभाग ने लगभग 7000 करोड़ रुपये के लेन-देन में संभावित टैक्स चोरी का पता लगाया है। इस मामले में फिलहाल राजस्थान के करीब 900 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और उन्हें अपनी आयकर रिटर्न संशोधित करने का मौका दिया गया है।

यह पूरा मामला जयपुर शहर के शहरी क्षेत्र और उसके आसपास के करीब 8 किलोमीटर के बफर जोन से जुड़ा हुआ है। इस दायरे में लगभग ढाई सौ गांव आते हैं, जहां पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त हुई है। आयकर विभाग ने इन जमीन सौदों का डेटा जुटाकर जांच की तो कई मामलों में कैपिटल गेन टैक्स नहीं चुकाने की बात सामने आई। इस कार्रवाई की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार का सर्वे या छापा नहीं मारा गया। आयकर विभाग ने तकनीक का सहारा लिया और इसके लिए IIT दिल्ली के साथ सहयोग किया गया। IIT दिल्ली की तकनीकी टीम ने सैटेलाइट इमेज और डिजिटल मैपिंग के जरिए म्युनिसिपल सीमा से 8 किलोमीटर तक के बफर जोन की पहचान की। इसी आधार पर जमीन के सौदों का तकनीकी आकलन किया गया।

आयकर विभाग ने यह कार्रवाई आयकर अधिनियम की धारा 2(14)(3) के तहत की है। इस प्रावधान के अनुसार, अगर कोई कृषि भूमि नगर निगम या नगर निकाय क्षेत्र के पास स्थित बफर जोन में आती है और उसे बेचा जाता है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। कई लोगों में यह गलतफहमी थी कि कृषि भूमि बेचने पर टैक्स नहीं देना पड़ता, जबकि शहरी सीमा के पास की जमीन पर यह नियम लागू होता है।

अभी टैक्स जमा करने का दिया गया मौका

विभाग ने नोटिस भेजकर संबंधित लोगों को अपनी आयकर रिटर्न संशोधित करने का अवसर दिया है। यदि वे रिटर्न संशोधित करके कैपिटल गेन टैक्स जमा कर देते हैं तो आगे की कार्रवाई से बच सकते हैं। जयपुर के अलावा जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, पाली समेत राजस्थान के कुल 14 शहरों के आसपास हुई कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त भी आयकर विभाग की निगरानी में है। आने वाले समय में इन शहरों में भी नोटिस जारी किए जा सकते हैं।

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