Tuesday, 29 Sep 2026

एथेनॉल आवंटन बढ़ाने के अदालती निर्देश बरकरार: SC

नईदिल्ली (01 जुलाई 26)। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसमें 'एथेनॉल आपूर्ति वर्ष' (ईएसवाई) 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने का आदेश दिया गया था। न्यायालय एक तेल विपणन कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि उच्च न्यायालय का आदेश पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर देगा।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर नोटिस जारी किया। उच्च न्यायालय ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिया था कि वे एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग करने वाले एक समर्पित एथेनॉल निर्माता द्वारा सौंपी गई अर्ज़ी पर विचार करें और उस पर निर्णय लें।  उच्च न्यायालय ने कहा था कि जो समर्पित एथेनॉल संयंत्र सरकारी नीति के तहत बनाए गए हैं और अनुबंध के अनुसार सिर्फ तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को ही एथेनॉल आपूर्ति करने के लिए बाध्य हैं, उन्हें 'लॉन्ग-टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट' (एलटीओए) के तहत मिलने वाले प्राथमिकता वाले आवंटन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि ओएमसी को वीआईपीएन डिस्टिलरीज एंड शुगर्स के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश देने वाला उच्च न्यायालय का आदेश राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर देगा।

शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम अभी प्रायोगिक चरण में है और इस नीति का असर अगले साल तक और साफ हो जाएगा। वेंकटरमणी ने बताया कि एथेनॉल आपूर्ति के अनुबंध अक्टूबर 2025 में पूरे हो गए थे। उन्होंने कहा कि एथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया 17 अक्टूबर, 2025 को पूरी हो गई थी और 378 आपूर्तिकर्ताओं को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति के लिए आवंटन की जानकारी दी गई थी, जिसमें से 18 जून तक वे 680 करोड़ लीटर की आपूर्ति कर चुके थे। उन्होंने कहा कि अगर किसी एक आपूर्तिकर्ता का कोटा बढ़ाया जाता, तो वैसी ही स्थिति वाले दूसरे आपूर्तिकर्ता भी बराबरी का दावा करते, जिससे कानूनी मुकदमों की बाढ़ आ जाती। 



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