Wednesday, 30 Sep 2026

एयर टर्बुलेंस: 300 फीट नीचे आया Air India का विमान

नईदिल्ली (04 अगस्त 26)। फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ़्लाइट को मंगलवार को रास्ते में टर्बुलेंस (हवा के तेज़ झोंकों) का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई अचानक और कुछ देर के लिए कम हो गई। यह घटना फ़्लाइट AI2379 में हुई, जिसमें क्रू के कंट्रोल वापस पाने से पहले विमान लगभग 300 फीट नीचे गिर गया। हालांकि, टर्बुलेंस के दौरान कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं।

वहीं, एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में आए टर्बुलेंस ने एक बार फिर यात्रियों के बीच उड़ान के दौरान होने वाली इस आम लेकिन अक्सर गलत समझी जाने वाली घटना पर चर्चा शुरू कर दी है। जैसे कि क्या टर्बुलेंस का मतलब है कि विमान असुरक्षित है? क्या इससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है? और मानसून के दौरान यह ज्यादा क्यों महसूस होता है? आइए समझते हैं....टर्बुलेंस का मतलब हवा की अनियमित और अस्थिर गति से है, जिसके कारण विमान में झटके महसूस होते हैं या कह सकते है कि उसकी ऊंचाई में अचानक बदलाव आ सकता है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह वैसा ही है जैसे कार ऊबड़-खाबड़ सड़क या स्पीड ब्रेकर से गुजरती है। विमान हवा के ऐसे हिस्से से गुजर रहा होता है जहां हवा का प्रवाह स्थिर नहीं होता। यात्रियों को भले ही तेज झटके महसूस हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि विमान आसमान से गिर रहा है। आधुनिक कमर्शियल विमान इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे सामान्य से कहीं ज्यादा मजबूत हवा के दबाव और झटकों को सहन कर सकें।

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2019 से 26 तक भगोड़ों की 17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त 

नईदिल्ली (04 अगस्त 26)। भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' लागू हुआ। गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, भारत ने भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित किया है, जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता साफ हुआ।

2014 से पहले प्रत्यर्पण के कानून कालबाह्य हो गए थे और केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। 2004 से 2013 के बीच एक वर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। इसके अलावा, अधूरे दस्तावेज और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल हो गई थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थीं। साथ ही, कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं जैसे, दोहरे अभियोजन से बचाव और दोहरे अपराध के सिद्धांत के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द किए जाते थे। गृह मंत्रालय और अन्य विभागों में समन्वय और एकीकृत रणनीति का अभाव भी था और भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमी गति से चलते थे।

भगोड़ों को वापस लाने को लेकर पहले की सरकारों में पॉलिटिकल विल का अभाव था, मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, केन्द्रीय गृह मंत्री ने भगोड़ों के खिलाफ तीन स्तंभों पर जोर दिया है- वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति। अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया है। मोदी सरकार 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा।



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