बेंगलुरु (16 जून 26)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि संघ को किसी के सामने जवाब देने की जरूरत नहीं है। दरअसल, प्रियांक खरगे ने हाल ही में मोहन भागवत को पत्र लिखकर RSS को रजिस्टर्ड कराने और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे। इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से 'अहंकार छोड़कर' कानून का पालन करने को कहा है। खरगे ने साथ ही कहा कि एक तरफ तो आरएसएस दावा करता है कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है वहीं दूसरी ओर वह समाज और राजनीति पर व्यापक प्रभाव रखता है, जो कि स्वीकार्य नहीं है। खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा संघ को पंजीकृत कराने की मांगों को खारिज किए जाने के जवाब में सोमवार देर रात एक पोस्ट में यह बात कही। खरगे ने कहा कि भगवत का यह दावा सबसे अधिक चिंताजनक है कि आरएसएस किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा 'जबकि वे करदाताओं के पैसे से मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं और प्रोटोकॉल का लाभ उठाते हैं। खरगे ने कहा कि यह ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जिसमें सार्वजनिक जवाबदेही को वैकल्पिक माना जाता है और यह समझा जाता है कि संगठन कानूनी जांच-परख से ऊपर है। उन्होंने कहा, 'एक संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था चाहे वह कितनी ही पुरानी या प्रभावशाली क्यों न हो ऐसा विशेषाधिकार नहीं रखती। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए और अपने 'पदाधिकारियों' या 'कानूनी प्रमुखों' को मेरे पास भेजिए, ताकि वे मुझे इसका स्पष्टीकरण दें।
उन्होंने कहा, 'मैं स्थिति को स्पष्ट कर देना चाहता हूं। आरएसएस को एक सांस्कृतिक संगठन होने का पूरा अधिकार है, यह उनका निर्णय है। लेकिन यह संभव नहीं है कि वह समाज और राजनीति पर व्यापक प्रभाव भी रखे और बार-बार यह भी दावा करे कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, इसलिए वह किसी भी सार्वजनिक जवाबदेही के लिए बाध्य नहीं है। स्वयं भाजपा भी आरएसएस को अपना वैचारिक मार्गदर्शक मानती है और सार्वजनिक जीवन पर उनका प्रभाव स्पष्ट और निर्विवाद है।