नईदिल्ली (21 जुलाई 24)। संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक में रविवार को कांग्रेस ने विपक्ष के लिए लोकसभा उपाध्यक्ष का पद मांगा और प्रतिष्ठित नीट सहित पेपर लीक से जुड़े अन्य मुद्दे उठाए। इसके साथ ही कांग्रेस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालयों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश का मुद्दा भी उठाया तथा स्पष्ट संकेत दिया कि वह इस सत्र को हंगामेदार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है।
इतना ही नहीं, सरकार के सहयोगी और महत्वपूर्ण मौकों पर उसका साथ देने वाले अन्य दलों ने भी अपने-अपने राज्यों के विशेष दर्जे का मुद्दा उठाते हुए केंद्र को अपनी प्राथमिकताओं से अवगत कराया और अपने भावी रुख का मुजाहिरा किया। सरकार ने सत्र से पहले होने वाली इस पारंपरिक बैठक में कई छोटे दलों को आमंत्रित किया और सभी मुद्दों पर चर्चा करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने जोर देकर कहा कि यह नियमों के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि यह सामूहिक जिम्मेदारी है।
भाजपा के सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड), बीजू जनता दल (बीजद) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधियों ने 44 दलों के साथ हुई बैठक में क्रमश: बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान विपक्षी राजद ने भी विशेष दर्जे की बिहार की मांग दोहराई।