Monday, 28 Sep 2026

कान्हा में लौटेंगे जंगली भैंसें: काजीरंगा से शुरू होगा ट्रांसलोकेशन

बालाघाट (27 अप्रैल 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चीता पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से विलुप्त हो चुकी 'जंगली भैंस' (वाइल्ड बफेलो) प्रजाति की पुनर्स्थापना की रणनीति अब साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 अप्रैल को बालाघाट जिले के सूपखार एवं टोपला क्षेत्र में कार्यक्रम के अंतर्गत 'जंगली भैंस' पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सूपखार में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे। इनमें 3 मादा और एक नर जंगली भैंसा शामिल हैं। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, अधिकारीगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहेंगे। इस पहल से भैंस प्रजाति के संरक्षण के साथ ही राज्य का वन पारिस्थितिकी तंत्र भी सशक्त बनेगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत असम के काजीरंगा से जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। पहले चरण में 4 भैंसों का दल अपनी यात्रा प्रारंभ कर चुका है। कुल 50 भैंसों के समूह को ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में लाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस सीजन में 8 भैंसों को स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अनुभवी पशु-चिकित्सकों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से संपन्न की जा रही है। इस परियोजना के साथ ही मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का नया अध्याय भी जुड़ रहा है। असम से गैंडे (राइनो) के दो जोड़े मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। इसके बदले में मध्यप्रदेश, असम की मांग के अनुसार 3 बाघ और 6 मगरमच्छों का स्थानांतरण करेगा। इस पर गुवाहाटी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा के बीच हुई बैठक में सहमति बनी थी।चीता पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। यह पहल एक प्रजाति के संरक्षण के प्रयास के साथ ही प्रदेश के वन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

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