भोपाल (11 सितंबर 24)। मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण होने के साथ कृषि प्रधान राज्य है। प्रदेश में तिलहन, दलहन, फल, सब्जी, वनोपज आदि का भरपूर उत्पादन होता है। इन सबके बाबजूद भी एनीमिया और कुपोषण की समास्याएँ कम नहीं हुई है। कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता आवश्यक है। यह बात महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने नूर उस सबा होटल में सॉलिडेरिडाड संस्था द्वारा 'गुड फार्मिंग, गुड फूड, गुड हेल्थ' विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थी।
मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि कुपोषण और एनीमिया जैसी समास्याओं से उभरने के लिये इमें एकजुट होकर कार्य करने होगें। ग्रामीण परिवारों में पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता लाना, स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर गुणवत्ता पूर्ण पोषक आहार को बढ़ावा देना होगा। इस कार्य में सामाजिक संस्थाएँ अहम भूमिका निभा सकती है। स्वास्थ्य महिला बाल विकास एवं पंचायत, ग्रामीण विकास विभाग इस दिशा में मिलकर काम करे तो सफलता निश्चित मिलेगी। सुश्री भूरिया ने कहा कि वर्तमान में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। फसलों में उत्पादन बढा़ने के लिये केमिकल फर्टिलाइजर/दवाईयों का इस्तेमाल किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। क्वालिटी काम्प्रोमाईस हो रही है। उन्होंने कहा कि सॉलिडरीडाड संस्था सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थ को आहार में सम्मिलित करने एवं समुदाय में संतुलित आहार के प्रति जागरूकता लाने में सफलतापूर्वक अपना सहयोग दे रही है। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया 'गुड फार्मिंग, गुड फूड, गुड हेल्थ' विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।