नईदिल्ली (05 अगस्त 26)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और राज्य की औषधि परीक्षण प्रयोगशालों ने इस साल मई में 155 चिकित्सा उत्पादों को ''मानक गुणवत्ता का नहीं'' और दो दवाओं को नकली पाया। नड्डा ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण मुख्य रूप से औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम एवं उसके अंतर्गत नियमों के प्रावधानों के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा विनियमित किया जाता है।
नड्डा ने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन का उत्तरदायित्व, राष्ट्रीय विनियामक प्राधिकरण के रूप में, नयी दवाओं और नैदानिक परीक्षणों का अनुमोदन, दवाओं के लिए मानक का निर्धारण, आयातित दवाओं की गुणवत्ता का विनियमन और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना है। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने टीबी (तपेदिक) को नियंत्रित करने में काफी प्रगति की है और 2015 से 2024 के बीच टीबी की दर में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि पिछले तीन साल में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत मधुमेह (डायबिटीज) के 2.29 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं। नड्डा ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में टीबी के मामलों की रिपोर्टिंग (नोटिफिकेशन) में वृद्धि हुई है, जिससे गायब या रिपोर्ट नहीं किए गए मामलों के अंतर को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि नि-क्षय पोर्टल के अनुसार, 2023 में 25.52 लाख, 2024 में 26.18 लाख और 2025 में 26.37 लाख टीबी मामलों की रिपोर्ट की गई।