Wednesday, 30 Sep 2026

गोली का जवाब गोले से देना जानती है मौजूदा सरकार

नईदिल्ली (27 जून 25)। पूर्व राजनयिक विवेक कटजू द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर की गई टिप्पणी एक वरिष्ठ राजनयिक के स्तर के अनुरूप नहीं है। उन्होंने पुरी द्वारा 'थिएटर ऑफ द अब्सर्ड' शब्द का गलत अर्थ निकाला और जानबूझकर विवाद पैदा करने की कोशिश की। यह बात भारत के ही पूर्व राजनयिक भास्वती मुखर्जी ने अपने लेख मे लिखी है।

पुरी ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर कहा था कि पहले की सरकारें पाकिस्तान के झूठे बयानों को सच मानती थीं और आतंकवाद को उनकी राज्य नीति का हिस्सा होने के बावजूद बातचीत करती थीं। 26/11 के बाद भी भारत ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। आज स्थिति बदली है, अब भारत आतंक के खिलाफ सीधा और प्रभावी जवाब दे रहा है। पुरी के बयान का संदर्भ साफ था, यूपीए सरकार की आतंकवाद से निपटने की नीति को जनता और विशेषज्ञों द्वारा अक्सर कमजोर और हास्यास्पद माना गया है। कटजू का यह कहना कि मोदी सरकार की शुरुआती पाकिस्तान नीति भी उतनी ही विफल थी, भ्रामक और सतही है, क्योंकि दोनों समय के राजनीतिक संदर्भ बिल्कुल अलग थे।

पुरी ने खुद स्वीकारा है कि उन्होंने भाजपा की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति से सहमति के चलते पार्टी जॉइन की। वह 1974 से 2013 तक भारतीय विदेश सेवा में रहे और अधिकतर कांग्रेस सरकारों के अंतर्गत काम किया। उस समय भारत की आतंकवाद से निपटने की रणनीति को कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपर्याप्त और कमजोर माना-खासतौर पर 26/11 के संदर्भ में। 'रणनीतिक संयम' की नीति उस समय कई अधिकारियों को भी स्वीकार नहीं थी। 'पुरी राजनेता' दरअसल 'पुरी राजनयिक' के अनुभवों से ही बने हैं, उन्होंने खुद देखा कि भारत कैसे आतंकवाद और असममित युद्ध से निपटने में असफल रहा। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे उस रक्षात्मक सोच को आज भी समर्थन दें।


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