नईदिल्ली (23 सितंबर 25)। देशभर में नए जीएसटी सुधारों (जीएसटी 2.0) के लागू होने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर में व्यापारियों और ग्राहकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जीएसटी सुधारों के लाभ और इसके पीछे की सोच को साझा किया। वित्त मंत्री ने व्यापारियों से अपील की कि वे ग्राहकों को 'देवता' की तरह मानें, क्योंकि नए जीएसटी सुधारों का उद्देश्य आम नागरिकों को राहत देना और कारोबार को आसान बनाना है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 'नागरिक देवों भव:' का संदेश दिया है, जिसका मतलब है कि नागरिकों का सम्मान और उनके लिए काम करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने व्यापारियों से कहा, 'दुकानदारों को भी ग्राहकों को देवता की तरह मानना चाहिए।' वित्त मंत्री ने बताया कि पहले भारत में अलग-अलग राज्यों में विभिन्न टैक्स सिस्टम थे, जिससे व्यापारियों को काफी परेशानी होती थी। 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद कई टैक्स एक टैक्स में समाहित हो गए, जिससे कारोबार करना आसान हो गया।
वित्त मंत्री ने जीएसटी के सफर को याद करते हुए बताया कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद सुधारों की गुंजाइश कम थी। 2019 के चुनाव और फिर कोविड-19 महामारी के कारण इस पर ध्यान देना मुश्किल था। लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री के निर्देश पर जीएसटी पर काम शुरू हुआ और मात्र एक महीने में नए सुधार तैयार कर जीएसटी काउंसिल में पास कर दिए गए। नए जीएसटी 2.0 के तहत पहले के 5%, 12%, 18% और 28% के स्लैब्स को घटाकर केवल दो स्लैब्स 5% और 18% कर दिए गए हैं। रोजमर्रा की 375 वस्तुओं की कीमतें कम की गई हैं, जिनमें से ज्यादातर अब 5% टैक्स स्लैब में हैं। इससे आम आदमी की जेब पर सकारात्मक असर पड़ा है और सामान सस्ते हो गए हैं।