दावोस (22 जनवरी 26)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा है कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हालांकि, इस बयान के साथ ही उन्होंने NATO और यूरोप को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया। NATO पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'हम बहुत कुछ देते हैं, लेकिन बदले में हमें बहुत कम मिलता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका को NATO और यूरोप से सिर्फ 'मौत, अशांति और भारी मात्रा में पैसा खर्च करने' के अलावा कुछ नहीं मिला, जो ऐसे लोगों पर खर्च होता है जो अमेरिका की मदद की कद्र नहीं करते। अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने दर्शक दीर्घा में मौजूद NATO प्रमुख मार्क रुटे की ओर इशारा किया। ट्रंप ने याद दिलाया कि इससे पहले रुटे ने NATO देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए ट्रंप के दबाव की तारीफ की थी।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने कहा कि अगर वह 'अत्यधिक ताकत और बल' का इस्तेमाल करें, तो अमेरिका कुछ भी हासिल कर सकता है और उसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन उन्होंने साफ कहा, 'मैं ताकत का इस्तेमाल नहीं करूंगा।' इसके बाद ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को NATO से 'कुछ भी नहीं मिला', सिवाय इसके कि वह रूस से यूरोप की रक्षा करता रहा है। हालांकि, हकीकत यह है कि NATO का सामूहिक रक्षा समझौता यानी आर्टिकल 5 अब तक सिर्फ एक बार लागू हुआ है, वह भी 9/11 आतंकी हमले के बाद, जब NATO देशों ने अमेरिका का साथ दिया था। अपने बयान के अंत में ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा दोहराई, जिससे यह साफ हो गया कि यह मुद्दा अभी भी उनकी प्राथमिकताओं में बना हुआ है। ट्रंप ने कहा, 'ग्रीनलैंड एक बहुत बड़ा, लगभग पूरी तरह से बिना आबादी वाला और अविकसित इलाका है। यह अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक अहम रणनीतिक जगह पर बिना किसी सुरक्षा के है। यह ठीक वहीं है, बिल्कुल बीच में... हमें यह रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहिए। यह विशाल असुरक्षित द्वीप असल में उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है, जो पश्चिमी गोलार्ध की उत्तरी सीमा पर है। वह हमारा इलाका है। इसलिए यह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का एक मुख्य हित है और असल में, सैकड़ों सालों से हमारी यह नीति रही है कि बाहरी खतरों को हमारे गोलार्ध में आने से रोका जाए और हमने इसे बहुत सफलतापूर्वक किया है। हम अभी जितने मजबूत हैं, उतने पहले कभी नहीं थे।'