पूर्वी चम्पारण (24 नवंबर 25)। बिहार के पूर्वी चंपारण (चकिया) में बन रहे विराट रामायण मंदिर के लिए एक बड़ा कदम पूरा हो गया है। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में शामिल यह विशाल शिवलिंग अब तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के लिए रवाना हो चुका है। यह शिवलिंग पिछले 10 वर्षों से तैयार किया जा रहा था।
शिवलिंग का आकार और वजन चौंकाने वाला है। मिली जानकारी अनुसार ऊंचाई 33 फीट और चौड़ाई भी 33 फीट रहेगी। इसका वजन 210 मीट्रिक टन और निर्माण लागत करीब 3 करोड़ रुपये आएगी। इसे एक विशाल ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस महाशिवलिंग को 96 चक्कों वाले विशेष ट्रांसपोर्टर ट्रक पर लादकर बिहार भेजा जा रहा है। ऐसे भारी धार्मिक ढांचों को सड़क मार्ग से ले जाना अपने आप में एक बड़ा इंजीनियरिंग कार्य है। शिवलिंग को भेजने से पहले, महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में पारंपरिक वैदिक विधि-विधान से पूजा की गई। स्थानीय लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनकर शिवलिंग को विदाई दी। शिवलिंग का बिहार तक सफर लगभग 20–25 दिनों का होगा। यात्रा मार्ग इस प्रकार है- महाबलीपुरम से होसुर, होसाकोट, देवनाहाली, कुरनूल, हैदराबाद, निजामाबाद, अदिलाबाद, नागपुर, सीवनी, जबलपुर, मैहर, सतना, रीवा, मिर्जापुर, आरा, छपरा, मसरख, मोहम्मदपुर, केसरिया से होकर चकिया (मोतिहारी)।
रास्ते में कई शहरों में लोग इस विशाल शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। चकिया में बन रहा विराट रामायण मंदिर अपनी भव्यता के लिए खास है। इस मंदिर का क्षेत्रफल करीब 115 एकड़, जिसकी लंबाई करीब 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट रहेगी। मुख्य शिखर की ऊंचाई करीब 270 फीट और कुल शिखर 18 होंगे। यही नहीं परिसर में कुल 22 मंदिर बनाएं जाएंगे। मंदिर के प्रवेश द्वार, सिंह द्वार, गणेश स्थल, नंदी और गर्भगृह की पाइलिंग जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। मंदिर निर्माण कार्य महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है। निर्माण कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार फरवरी 2026 तक इस भव्य शिवलिंग को मंदिर परिसर में स्थापित कर दिया जाएगा। यह स्थापना मंदिर को वास्तु और धार्मिक रूप से और भी भव्य बनाएगी।