सिलीगुड़ी (21 मई 26)। सिलीगुड़ी गलियारा जिसे लंबे समय से 'चिकन नेक' कहा जाता रहा है, अब भारत की नई रणनीतिक तैयारी का केंद्र बन गया है। रक्षा और सुरक्षा हलकों में इसे अब 'राइनो नेक' यानी गेंडे जैसी मजबूत ढाल में बदलने की चर्चा तेज है। यह वही संकरा भूभाग है जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई कई जगह सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर तक मानी जाती है, इसलिए इसे हमेशा रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना गया।
यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित है। इसके एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश और उत्तर में भूटान के पास चीन की रणनीतिक चुम्बी घाटी स्थित है। अगर युद्ध जैसी स्थिति बने, तो इस इलाके पर दबाव डालकर भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को बाकी देश से काटने की आशंका हमेशा जताई जाती रही है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाओं के लिए करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र को देने की मंजूरी दी है। इसके बाद इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस संवेदनशील इलाके से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का नियंत्रण और समन्वय मजबूत किया जा रहा है ताकि सेना जरूरत पड़ने पर तेजी से टैंक, मिसाइल और भारी उपकरण सीमा तक पहुंचा सके। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि युद्धकालीन लॉजिस्टिक्स बनाए रखने के लिए भूमिगत सुरंगों और सुरक्षित नेटवर्क पर काम हो रहा है, ताकि दुश्मन की निगरानी और हमलों से सप्लाई लाइन सुरक्षित रहे। पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में अतिरिक्त सैन्य ढांचे और फॉरवर्ड बेस विकसित किए जा रहे हैं।