Wednesday, 30 Sep 2026

चीन की परमाणु मिसाइलों में फ्यूल की जगह भरा पानी

वाशिंगटन (03 फरवरी 26)। चीनी सेना की रणनीतिक क्षमताओं को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कुछ परमाणु मिसाइलों में ईंधन (फ्यूल) की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे लॉन्च की स्थिति में होने के बावजूद उड़ान भरने में असमर्थ होतीं। यह मिसाइलें पश्चिमी चीन के शिनजियांग प्रांत में स्थित चीनी रॉकेट फोर्स के एक गोपनीय सैन्य ठिकाने पर तैनात थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी गंभीर खुलासे के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना में भ्रष्टाचार और अक्षमता के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए चीनी रॉकेट फोर्स के प्रमुख जनरल झांग यूक्सिया को पद से हटा दिया। यह कदम चीन की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

जनरल झांग यूक्सिया को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का करीबी और चीन के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिना जाता था। वे चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग में शी जिनपिंग के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य थे। यह आयोग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, पीपुल्स आर्म्ड पुलिस और मिलिशिया का सर्वोच्च नेतृत्व करता है। चीन की सैन्य रणनीति और हथियार विकास से जुड़े सभी बड़े फैसले इसी मंच से लिए जाते हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल झांग यूक्सिया को 19 जनवरी को हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियारों से जुड़ा संवेदनशील डेटा अमेरिका को लीक किया, पदोन्नति के बदले रिश्वत ली और पीएलए की युद्ध तैयारी से समझौता किया। चीन की सेना के आधिकारिक मुखपत्र PLA डेली में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा कि भ्रष्टाचार ने चीन की सैन्य युद्ध क्षमता को कमजोर किया है और ऐसे “बड़े दोषियों” पर सख्त कार्रवाई जरूरी है जो सैन्य बजट और हथियार प्रणालियों में हेरफेर करते हैं।

ब्लूमबर्ग की 2024 की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि शिनजियांग क्षेत्र में स्थित मिसाइल साइलो पर ऐसे ढक्कन लगाए गए थे, जो मिसाइल लॉन्च को प्रभावी ढंग से रोक सकते थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे केवल दिखावटी रूप से तैनात प्रतीत होती थीं। हालांकि, इन दावों को लेकर सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने कहा है कि भले ही कुछ मिसाइलों में अस्थायी रूप से पानी भरा गया हो, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं मानी जा सकती।

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