बीजिंग (01 सितंबर 26)। चीन ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करने की दिशा में नया कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त को संशोधित नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ को मंजूरी दी है, जो 1 अक्टूबर से लागू होने वाला है। इस संशोधित कानून को चीन की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत किसी युद्ध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की स्थिति में देश की नागरिक जनशक्ति, निजी कंपनियों, तकनीकी क्षमता, बुनियादी ढांचे और आर्थिक संसाधनों को राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के लिए तेजी से संगठित किया जा सके। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि युद्धकालीन जरूरतों के दौरान AI, ड्रोन, डेटा, साइबर क्षमता और निजी तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल रक्षा व्यवस्था के लिए किया जा सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, संशोधित कानून चीन को शांति के समय से तेजी से बड़े पैमाने पर युद्धकालीन लामबंदी की स्थिति में जाने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है। इसे 2010 के बाद चीन के राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी ढांचे में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद शामिल बताए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य केवल सेना की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरे समाज की तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक क्षमता को रक्षा जरूरतों के अनुरूप संगठित करना है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों को राष्ट्रीय रक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कार्यों के लिए लामबंद किया जा सकता है। बताया गया है कि कानूनी ढांचे के तहत 18 से 60 वर्ष तक के पुरुषों और 18 से 55 वर्ष तक की महिलाओं को कुछ परिस्थितियों में रक्षा संबंधी कार्यों और सहयोगी जिम्मेदारियों के दायरे में लाया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि युद्ध की स्थिति में चीन केवल अपनी नियमित सेना पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि नागरिक क्षमता को भी व्यापक रक्षा तंत्र से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। चीन के नए ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डुअल-यूज टेक्नोलॉजी है।डुअल-यूज टेक्नोलॉजी का मतलब ऐसी तकनीक से है जिसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।