Thursday, 01 Oct 2026

चेतावनीः भारत पर नए हमले की तैयारी में पाकिस्तान

नईदिल्ली (21 अक्टूबर 25)। सुरक्षा विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने आगाह किया है कि पारंपरिक युद्ध में असमर्थ पाकिस्तान अब भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने की रणनीति अपना सकता है। यदि पाकिस्तान चीन की मौन या खुले सहयोग के साथ गुजरात जैसे संवेदनशील व्यापारिक और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाता है, तो न केवल भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि वैश्विक तेल‑बाजार और निवेश धाराएँ भी डांवाडोल हो सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में अमेरिका का ‘मौन समर्थन’ संभावित है, जिससे भू‑राजनीतिक जटिलताएँ और गहरी होंगी।

पाकिस्तान ने पारंपरिक मोर्चे पर भारत को परास्त करने में सीमाएं देखी हैं, इसलिए रणनीति बदलते हुए अब वह आर्थिक परिसंपत्तियों बंदरगाह, रिफाइनरी, कंटेनर टर्मिनल और ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर  को निशाना बनाने का सोच सकता है। ऐसे हमले मात्र भौतिक तबाही नहीं करेंगे; वे बीमा प्रीमियम, वैश्विक तेल कीमतें और विदेशी निवेशकों के भरोसे पर भी असर डालेंगे। विश्लेषक आर. जगन्नाथन के हवाले से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान इस प्रयास में चीन से तकनीकी और खुफिया मदद ले सकता है और वैश्विक स्तर पर कुछ ताकतें जो भारत के तेज़ आर्थिक उदय से चिंतित हैं मौन समर्थन वाली भूमिका निभा सकती हैं। इससे भारत के आर्थिक लक्ष्य और रणनीतिक प्राथमिकताएँ प्रभावित हो सकती हैं।

गुजरात में रिफाइनरियां, कंटेनर टर्मिनल, बड़े औद्योगिक कक्ष और ऊर्जा परियोजनाएँ मौजूद हैं ये देश की कई उद्योगों की लाइफलाइन हैं। किसी बड़े हमले से न सिर्फ स्थानीय विनाश होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति‑शृंखलाएं और बाजार अस्थिर हो सकते हैं। विश्लेषक कहते हैं कि पाकिस्तान भारत के मौजूदा सैन्य संतुलन में दिखाई दे रही कमज़ोरी (वायुसेना की सीमित स्क्वाड्रन संख्या इत्यादि) का लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है। यदि भारत को आक्रामकता का सामना करना पड़े, तो इससे द्विपक्षीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप दोनों की सम्भावना बढ़ेगी।


 

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