Sunday, 27 Sep 2026

छह साल अंतरिक्ष में रहे टमाटर के 1.25 करोड़ बीज

वाशिंगटन (28 सितंबर 26)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने  क्या अंतरिक्ष में कई साल बिताने के बाद किसी पौधे के बीज बदल जाते हैं? क्या अंतरिक्ष का वातावरण उनके अंकुरण और विकास पर असर डाल सकता है? इन सवालों का जवाब जानने के लिए 1984 में एक अनोखा प्रयोग किया था। एजेंसी ने करीब 1.25 करोड़ टमाटर के बीज अंतरिक्ष में भेजे, जो लगभग छह साल बाद 1990 में पृथ्वी पर वापस लौटे। इसके बाद इन बीजों को छात्रों के बीच बांटकर बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रयोग कराया गया। नासा ने लौटे हुए बीजों को स्कूलों में प्लांट किट के रूप में उपलब्ध कराया। करीब 40 हजार स्कूलों के 33 लाखों छात्रों ने अंतरिक्ष में गए बीजों और पृथ्वी पर रखे गए समान बीजों को साथ-साथ उगाया और उनके विकास की तुलना की।

इस प्रयोग का नाम एसईईडीएस था। इसका उद्देश्य छात्रों को सीधे वैज्ञानिक प्रयोग से जोड़ने के साथ यह पता लगाना था कि लंबे समय तक अंतरिक्ष के वातावरण के संपर्क में रहने से बीजों के अंकुरण और पौधों के विकास में कोई अंतर आता है या नहीं। इसके लिए टमाटर के बीजों के दो समूह तैयार किए गए। एक समूह को अंतरिक्ष में भेजा गया, जबकि दूसरे समूह को पृथ्वी पर नियंत्रित परिस्थितियों में रखा गया। बाद में दोनों समूहों के बीज छात्रों को दिए गए, ताकि उन्हें एक जैसे वातावरण में उगाकर परिणामों की तुलना की जा सके। प्रयोग में इस्तेमाल किए गए करीब 1.25 करोड़ बीज ‘रटगर्स कैलिफोर्निया सुप्रीम’ किस्म के थे। एक ही किस्म के बीज चुनने का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि पौधों के बीच दिखाई देने वाला अंतर अलग-अलग आनुवंशिक गुणों की वजह से न हो। इस प्रयोग में नासा मुख्यालय, लैंगली रिसर्च सेंटर और बीज आपूर्तिकर्ता कंपनी जॉर्ज डब्ल्यू. पार्क सीड शामिल थे। बीजों को अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए लॉन्ग ड्यूरेशन एक्सपोजर फैसिलिटी का इस्तेमाल किया गया। यह एक बड़ा 12-तरफा ढांचा था, जिसका वजन करीब 9.7 टन था।  इसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में स्थिर रहने और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए तैयार किया गया था। इसी के माध्यम से टमाटर के बीजों को लंबे समय तक अंतरिक्ष के वातावरण के संपर्क में रखा गया।

लगभग छह साल अंतरिक्ष में रहने के बाद बीजों को 1990 में पृथ्वी पर वापस लाया गया। इसके बाद नासा ने इस प्रयोग को अंतरिक्ष प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय इसे कक्षाओं तक पहुंचाने की योजना बनाई। शिक्षकों को करीब 1.32 लाख प्लांटिंग किट बांटी गईं। ये किट करीब 40 हजार स्कूलों और लगभग 33 लाख छात्रों तक पहुंचीं। इसमें अमेरिका के सभी 50 राज्य, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और दुनिया के 30 अन्य देश शामिल थे। हर किट में अंतरिक्ष से लौटे बीजों के साथ पृथ्वी पर रखे गए समान बीज भी शामिल थे। पृथ्वी वाले बीजों को ‘कंट्रोल’ यानी तुलना के मानक के तौर पर इस्तेमाल किया गया। छात्रों को सिर्फ बीज बोने के लिए नहीं कहा गया था। उन्हें पूरे पौधे के विकास पर नजर रखनी थी। उन्होंने यह दर्ज किया कि कितने बीज अंकुरित हुए, पहला अंकुर कितने दिन में निकला और पौधे की लंबाई तथा विकास किस गति से हुआ। इसके अलावा फूल आने, फल बनने और पत्तियों व तनों की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी जुटाई गई। इसके बाद छात्रों और शिक्षकों ने अपना डेटा नासा को भेजा। नासा को कक्षाओं से करीब 8,000 रिपोर्ट प्राप्त हुईं, जिनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।

प्रयोग के आंकड़ों में अंतरिक्ष से लौटे बीजों की अंकुरण दर 73.8 प्रतिशत रही, जबकि पृथ्वी पर रखे गए बीजों की दर 70.3 प्रतिशत थी। वापसी के बाद शुरुआती छह महीनों में किए गए परीक्षणों में अंतरिक्ष से लौटे बीज औसतन 8 दिनों में अंकुरित हुए। पृथ्वी पर रखे गए बीजों को औसतन करीब 8.3 दिन लगे।शुरुआती तीन सप्ताह में अंतरिक्ष से लौटे बीजों से उगे पौधों में अपेक्षाकृत तेज विकास की प्रवृत्ति भी देखी गई। शुरुआती आंकड़ों में कुछ अंतर दिखाई देने के बावजूद प्रयोग के अंतिम परिणामों में पौधों और फलों के बीच कोई महत्वपूर्ण स्थायी अंतर नहीं मिला। शुरुआती बढ़त भी पौधों के विकास के पूरे चक्र में कायम नहीं रही।यानी छह साल अंतरिक्ष में रहने के बाद टमाटर के बीजों में ऐसा कोई बड़ा स्थायी बदलाव नहीं पाया गया, जिससे उनके पौधों या फलों को पृथ्वी पर रखे गए बीजों से स्पष्ट रूप से अलग माना जा सके।

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