रायपुर (17 मई 26)। देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, ईंधन खर्च और सरकारी फिजूलखर्ची पर अब राजनीति भी गरमा गई है। एक ओर केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे 'दोहरे मापदंड' की राजनीति बता रहा है। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार जनता को पेट्रोल बचाने की सीख दे रही है, लेकिन खुद सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग उसी गंभीरता का पालन करते नजर नहीं आते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे' भाजपा की कार्यशैली बन चुकी है। उनका आरोप था कि जनता से मितव्ययिता की अपेक्षा की जा रही है, जबकि सत्ता प्रतिष्ठान में दिखावे और यात्राओं पर खर्च लगातार जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ चुकी हैं और अब बचत के नाम पर जनता पर नैतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में ईंधन बचत राष्ट्रीय प्राथमिकता है, तो इसकी शुरुआत सरकार और उसके उच्च पदों से क्यों नहीं होती? इधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने खर्चों में कटौती को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों में सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग, काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम करने, वाहन पूलिंग सिस्टम लागू करने और विदेश यात्राओं पर नियंत्रण जैसे फैसले शामिल हैं। अब सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही संभव होंगी।