नईदिल्ली (1 मई 24)। भारत के अग्रणी सैन्य विचारकों में से एक जनरल के सुंदरजी की विरासत का उत्सव मनाने के लिए भारतीय सेना द्वारा मानेकशॉ सेंटर में चौथा जनरल सुंदरजी स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। यह व्याख्यान मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल (एमआईसी एंड एस) और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यूएस) के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ-साथ साहित्यकारों और विभिन्न विशेषज्ञों ने भाग लिया। व्याख्यान में उत्साही और दूरदर्शी 13वें सेनाध्यक्ष, जनरल के सुंदरजी को याद किया गया, जिन्हें प्यार से 'मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट का जनक' भी कहा जाता है।
थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल मनोज पांडे ने कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य दिया और जनरल सुंदरजी की दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने युद्धक्षेत्र के डिजिटलीकरण, सूचना संबंधी युद्धकला, प्रौद्योगिकी प्रसार, पारंपरिक रणनीतियों और बल संरचना के क्षेत्र में जनरल सुंदरजी के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जो उनके 'विज़न 2100' में परिलक्षित होता है।
सीओएएस ने परिवर्तन पर जनरल सुंदरजी के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि, 'भारतीय सेना परिवर्तन की अनिवार्यता के प्रति सजग है, और यह एक प्रगतिशील दृष्टिकोण के साथ है, हमारा इरादा न केवल बदलाव का है, बल्कि तीव्रता से बदलाव का भी है। भारतीय सेना का समग्र परिवर्तन, जिसे हमने दो साल पहले शुरू किया था, एक आधुनिक, चुस्त, अनुकूली, प्रौद्योगिकी से लैस, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार, बल को आकार देने के हमारे प्रयासों का हिस्सा है।'