इंदौर (04 जून 26)। शहर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। राजलक्ष्मी फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इंदौर नगर निगम को प्री-मानसून तैयारियों के तहत तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सरकारी और निजी संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सात दिन के भीतर चालू और प्रभावी बनाने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 जून 2026 को निर्धारित की गई है। जनहित याचिका में इंदौर के नागरिकों के स्वच्छ और पर्याप्त जल के अधिकार, भूजल संरक्षण और शहर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बताया गया है।
राजलक्ष्मी फाउंडेशन ने जनहित याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की प्रधानपीठ जबलपुर में माननीय न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा और माननीय न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की वेकेशन बेंच के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगाड़िया और अधिवक्ता आयुष चौधरी उपस्थित हुए। जनहित याचिका में इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार गिरते भूजल स्तर, झीलों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों के सूखने तथा पारंपरिक जल स्रोतों के खत्म होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। याचिका में कहा गया कि कई पारंपरिक फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके अलावा वर्षा जल संचयन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में विफलता, शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज और नॉन-रेवेन्यू वाटर जैसे मुद्दों को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। याचिका में परित्यक्त बोरवेल, ट्रीटेड वेस्टवॉटर के पुन: उपयोग, ग्रामीण और पेरी-अर्बन वाटरशेड पुनर्स्थापन तथा असराबद खुर्द, मिजार्पुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला समेत पारंपरिक जलाशयों की श्रृंखला के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग भी की गई।
आगामी मानसून को देखते हुए हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिए कि सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल्स, व्यावसायिक परिसरों, होटलों और अन्य संस्थानों को सात दिन के भीतर अपने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें क्रियाशील बनाने के संबंध में तत्काल सार्वजनिक सूचना जारी की जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मानसून से पहले वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय करना आवश्यक है, ताकि बारिश का पानी सीधे भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण में उपयोग हो सके
हाई कोर्ट ने नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को यह भी निर्देशित किया कि पहली भारी मानसूनी वर्षा से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, मोहरियों, झीलों के इनलेट्स, ओवरफ्लो आउटलेट्स और रिचार्ज चैनलों की आपातकालीन सफाई और डी-सिल्टिंग कराई जाए। न्यायालय ने कहा कि वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकना और उसे जलाशयों एवं भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग करना आवश्यक है। इसके लिए अवरोध हटाने और पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की जाए।