महू (14 अप्रैल 26)। संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली महू में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने मंगलवार को सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में कहा कि आरक्षण व्यवस्था तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक समाज में जातिगत भेदभाव का ज़रा भी अंश मौजूद है।
संविधान को 'वर्तमान युग की स्मृति' बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी ग्रंथ में लिखी कोई भी बात, जो सभी मनुष्यों की समानता के विरुद्ध हो, उसे अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए। 'स्मृति' उन ग्रंथों को कहते हैं, जो विद्वानों द्वारा समाज के लिए बनाए गए नियमों और विनियमों पर आधारित होते हैं। VHP के एक कार्यक्रम के दौरान, कुमार ने संतों और ऋषियों द्वारा पारित एक पुराने प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सभी मनुष्य समान हैं और 'ऊंच-नीच' या 'छूत-अछूत' के आधार पर किया जाने वाला सामाजिक भेदभाव भारतीय आध्यात्मिकता का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर होने वाला अन्याय, भले ही वह एक ही घटना क्यों न हो, पूरे देश के लिए शर्म की बात है।
सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था का ज़िक्र करते हुए कुमार ने कहा, 'हमारा मानना है कि यह आरक्षण एक प्रायश्चित है, और जब तक ज़रा भी भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण ज़रूरी है। इसे (आरक्षण व्यवस्था को) जारी रहना चाहिए।' उन्होंने कहा कि जब तक समाज का एक बड़ा तबका आर्थिक रूप से कमज़ोर रहेगा और शिक्षा, उद्योग तथा व्यापार के क्षेत्रों में पीछे रहेगा, तब तक समानता हासिल नहीं हो पाएगी। कुमार ने कहा कि देश की अगली लड़ाई यह सुनिश्चित करना है कि अनुसूचित जातियों को शिक्षा, कौशल और रोज़गार के क्षेत्रों में समान अधिकार मिलें।