नईदिल्ली (03 सितंबर 24)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि जाति जनगणना का इस्तेमाल राजनीति या चुनावी प्रक्रिया के बजाय केवल उन समुदायों या जातियों की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए जो पिछड़ रहे हैं। आरएसएस समन्वय बैठक के समापन दिवस पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आंबेकर ने कहा कि जाति और जाति संबंधों के मुद्दे बहुत संवेदनशील हैं और इन्हें बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि ये हमारी 'राष्ट्रीय एकता' और 'अखंडता' के मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा, 'आरएसएस के रूप में, हमने पहले ही इस मुद्दे पर टिप्पणी की है। हमारे हिंदू समाज में, हमारे पास जाति और जाति संबंधों का एक संवेदनशील मुद्दा है... यह हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसलिए इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, न कि केवल चुनावों, चुनाव प्रथाओं या राजनीति के आधार पर।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने पहले ही आंकड़े ले लिए हैं, लेकिन उन्हें केवल उन समुदायों या जातियों के सामने आने वाले मुद्दों को हल करने के लिए ही लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से, सभी कल्याणकारी गतिविधियों के लिए, विशेष रूप से किसी विशेष समुदाय या जाति को संबोधित करने के लिए जो पिछड़ रही है और जिस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, इसलिए यदि कभी सरकार को संख्या की आवश्यकता होती है, तो वह उसे ले सकती है। इसने (सरकार ने) पहले भी (संख्या) ली है; यह ले सकती है, इसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन यह केवल उन समुदायों और जातियों के कल्याण को संबोधित करने के लिए होना चाहिए। इसका उपयोग चुनाव प्रचार के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। और इसलिए हमने सभी के लिए एक चेतावनी रेखा रखी है।'