वाशिंगटन (11 मार्च 25)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा लेकर दूसरे देशों पर टैरिफ का दबाव बनाना शुरू किया। उनका मानना था कि इससे दूसरे देश अमेरिका के सामने झुकेंगे। हालांकि, इस नीति ने अमेरिका के खुद के आर्थिक हालात को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा लेकर दूसरे देशों पर टैरिफ का दबाव बनाना शुरू किया। उनका मानना था कि इससे दूसरे देश अमेरिका के सामने झुकेंगे। हालांकि, इस नीति ने अमेरिका के खुद के आर्थिक हालात को खतरे में डाल दिया है। टैरिफ अटैक से शुरुआत में चीन, कनाडा, मेक्सिको और भारत जैसे देशों पर असर पड़ा, लेकिन अब यह दांव खुद अमेरिका पर भारी पड़ता दिख रहा है।
ट्रंप की नीतियों ने अमेरिकी शेयर बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। सोमवार को अमेरिकी बाजार में तेज गिरावट आई, और डाओ जोंस ने नवंबर 2023 के बाद पहली बार 200 DMA के नीचे बंद किया। नैस्डैक में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर एलन मस्क की कंपनी टेस्ला पर पड़ा। टेस्ला के शेयरों में 15.43 फीसदी की भारी गिरावट आई, और यह 222.15 USD पर बंद हुए। दो महीने पहले टेस्ला के शेयर 488.54 USD थे, यानी अब तक 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इससे एलन मस्क की नेटवर्थ में भी 29 अरब डॉलर की कमी आई है। पूरे यूरोप में टेस्ला की बिक्री में 45% की गिरावट आई है, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री की कुल रजिस्ट्रेशन में 37% की वृद्धि देखने को मिली है। इसका मतलब यह है कि जबकि पूरी इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ी है, टेस्ला अपने प्रमुख यूरोपीय बाजारों में पिछड़ता जा रहा है।