Monday, 28 Sep 2026

डिग्री देने वाली शिक्षा अधूरी, चरित्र निर्माण भी जरूरी’: सिंह

लखनऊ (29 अगस्त 26)। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने शनिवार को दार्शनिक अंदाज में कहा कि यदि मन बड़ा नहीं है और दूसरों को देखकर ईर्ष्या होती है, तो यह मान लेना चाहिए कि आप पर ईश्वर की कृपा नहीं है। सिंह ने कहा, 'जब उपलब्धियां मूल्यों पर आधारित होती हैं तभी जीवन सार्थक होता है। जब शिक्षा केवल डिग्री दे लेकिन उससे चरित्र का विकास न हो तो ऐसी शिक्षा का कोई मूल्‍य नहीं है, वह अधूरी है। उन्होंने यहां बाबा साहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में कहा, 'पवित्र मन उसी का होता है, जिसका मन बड़ा होता है। छोटे मन का व्यक्ति कभी पवित्र मन का नहीं हो सकता।'

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।  सिंह ने एक विदेशी अखबार द्वारा पूर्व में भारत को लेकर व्यंग्य में कार्टून बनाने का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की सफलता और 'अंतरिक्ष क्षमता' देखकर हैरान है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन किसी चमत्कार से नहीं है बल्कि आप जैसे नौजवानों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत, उनकी लगन से आया है। उन्‍होंने कहा कि सफलता की यात्रा अक्सर चार पड़ावों से होकर गुजरती है-पहले लोग आपको नजर अंदाज करते हैं, फिर आप पर हंसते हैं, फिर वह आपका विरोध करते हैं और अंत में वही लोग आपकी सफलता की तारीफ करते हैं। सिंह ने कहा, 'आपको भी ऐसे लोग मिलेंगे जो आपकी उपेक्षा करेंगे, आपका मजाक उड़ाएंगे और कहेंगे कि यह कैसे कर सकता है, आपके रास्‍ते में बाधाएं खड़ी करेंगे लेकिन आपको रुकना नहीं है, आत्‍मविश्‍वास के साथ आगे बढ़ना है।' रक्षा मंत्री ने कहा, 'मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि आपको सफल होने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती है। पिछले 12 वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं सुलभता बढ़ी है। शिक्षा के क्षेत्र में बदलावों और अच्‍छी योजनाओं का परिणाम है कि आज देश के नौजवान भौतिकी, गणति, जीवविज्ञान के ओलंपियाड में मेडल जीत रहे हैं, स्‍टार्टअप खड़ी कर रहे हैं, हाइड्रोजन ट्रेन, ड्रोन और कंपनियां बना रहे हैं।' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा तीसरा स्‍टार्टअप पारितंत्र बन चुका है। 

सिंह ने यह भी कहा, 'आर्थिक शक्ति किसी राष्‍ट्र को समृद्ध बनाती है लेकिन सांस्‍कृतिक आत्‍मविश्‍वास हमें महान बनाता है। हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का ही परिणाम है कि हमारे देश ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया।' रक्षा मंत्री ने दावा किया, 'पहले भारत बोलता था तो दुनिया सुनती नहीं थी, लेकिन आज भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलता है तो सारी दुनिया कान खोलकर सुनती है कि भारत क्या बोल रहा है।' विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, 'जिंदगी का सफर लंबा है और इसे साधना की तरह लेना चाहिए। मन जितना बड़ा होगा, सुख और आनंद की प्राप्ति उतनी ही अधिक होगी।' बाबा साहब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, 'डॉ. आंबेडकर को उस नल से पानी नहीं पीने दिया जाता था, जिससे सभी बच्चे पानी पीते थे। इतना अन्याय सहने के बाद भी उन्होंने भाग्य को कोसने या हिंसा का रास्ता चुनने के बजाय शिक्षा का मार्ग चुना और भारत आकर लोगों में बदलाव की इच्छा जगाई।' रक्षा मंत्री ने कहा कि कोई न कोई 'सुपर पावर' है जो पूरे ब्रह्मांड को निर्देशित कर रहा है तथा संतों की कही बातों को आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है।

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