Tuesday, 29 Sep 2026

डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग को नई गति देने पर मंथन

भोपाल (20 जून 26)। रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण) सुशील कुमार सतपुते ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थाएं एक साझा मंच पर आकर नवाचार आधारित रक्षा विनिर्माण को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत औद्योगिक एवं नवाचार आधारित इको सिस्टम विकसित करना समय की आवश्यकता है और केंद्र व राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन "आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स" की तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय, भोपाल में तीसरे चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

कार्यशाला में देशभर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी कर अपने सुझाव साझा किए। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय पहल में 'इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम' विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) राज्य की भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, राज्यों की भूमिका तथा मध्यप्रदेश की सह-नेतृत्व जिम्मेदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान बताया गया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए सात प्रमुख रणनीतिक विषय निर्धारित किए हैं, जिन पर राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण चरण हितधारकों के साथ सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा रहा। उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विशेष रूप से स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर उपयोगी सुझाव सामने आए।

कार्यशाला में बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, एमपीएमएसएमई, ग्लोबल स्किल पार्क, आईआईएसईआर भोपाल तथा एमपीएसईडीसी सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, धारवाड़, इंदौर, जम्मू, कानपुर, भिलाई, गांधीनगर एवं मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु, नासकॉम, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑर्डनेंस लिमिटेड, गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्रा. लि. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इन संस्थानों की भागीदारी से कार्यशाला को राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तकनीकी विशेषज्ञता मिली। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक राज्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश की रणनीति और सुझावों का आधार बनेगी।




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