नईदिल्ली (25 अगस्त 25)। भारत ने शनिवार को वाशिंगटन के इन आरोपों को जोरदार तरीके से खारिज कर दिया कि नई दिल्ली रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर और फिर परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोप और अन्य स्थानों पर ऊंची कीमतों पर बेचकर 'मुनाफाखोरी' में शामिल है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि नयी दिल्ली की खरीद प्रक्रिया न सिर्फ उसके राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक हित में भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना जारी रखेगा।
जयशंकर ने कहा कि अमेरिका का पिछला प्रशासन नई दिल्ली के रूस से कच्चे तेल की खरीद का समर्थन करता था, क्योंकि इससे तेल बाजार में स्थिरता आती है। उन्होंने कहा, 'यह हास्यास्पद है कि व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।' विदेश मंत्री ने कहा, 'यह वाकई अजीब है। अगर आपको भारत से तेल या परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने में कोई समस्या है, तो उसे न खरीदें। कोई आपको खरीदने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है, लेकिन अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो उसे न खरीदें।' ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में जयशंकर ने यह टिप्पणी उस समय की, जब उनसे अमेरिकी अधिकारियों के रूस के साथ ऊर्जा संबंधों को लेकर भारत की आलोचना किए जाने के बारे में पूछा गया।
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने बुधवार को कहा था कि भारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर और फिर परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोप और अन्य स्थानों पर ऊंची कीमतों पर बेचकर 'मुनाफाखोरी' में शामिल है। उन्होंने पहले भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। जयशंकर ने आश्चर्य जताया कि यही मानदंड चीन और यूरोपीय संघ पर क्यों नहीं लागू किया गया, जो क्रमशः रूसी कच्चे तेल और रूसी एलएनजी के सबसे बड़े आयातक हैं। उन्होंने कहा, 'भारत को निशाना बनाने के लिए जिन तर्कों का इस्तेमाल किया गया है, वे सबसे बड़े तेल आयातक, चीन और सबसे बड़े एलएनजी आयातक, यूरोपीय संघ पर लागू नहीं किए गए हैं।' विदेश मंत्री ने सवाल किया, 'जब लोग कहते हैं कि हम युद्ध के लिए धन मुहैया करा रहे हैं या (राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन के खजाने में पैसा डाल रहे हैं... तो रूस-यूरोपीय संघ का व्यापार भारत-रूस व्यापार से बड़ा है। तो क्या यूरोप पुतिन के खजाने में पैसा नहीं डाल रहा है?' जयशंकर ने माना कि पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ी है और कहा कि यह राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है।