Monday, 28 Sep 2026

दबाव में लगे थे बृजभूषण पर आरोप: अदालत

नईदिल्ली (11 अगस्त 26)। दिल्ली की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि पांच शिकायतकर्ता पहलवानों में से दो ने बताया कि उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के लिए 'मजबूर किया गया/दबाव डाला गया' था। अदालत ने कहा कि उनकी गवाही से लगता है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित, 'झूठा, मनगढ़ंत और गहरी साजिश के तहत सामूहिक रूप से तैयार किया गया' है। सिंह को यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी करने वाले फैसले की देखी है। इसमें अदालत ने सवाल उठाया कि शिकायतकर्ताओं ने कथित पहली घटना को लेकर कैसे 'गलत देश और साल' का जिक्र किया। उसने कहा कि 'यह विरोधाभास अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करता है और गवाह की विश्वसनीयता पर असर डालता है', क्योंकि 'यौन उत्पीड़न की कथित घटना जिस स्थान पर हुई थी, उसे याद न रख पाना कोई सामान्य बात नहीं, बल्कि असाधारण व्यवहार है।' अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 239 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता पहलवानों ने दावा किया कि चूंकि उन्हें अपना करियर खत्म होने का डर था, इसलिए उन्होंने आरोपी के खिलाफ समय रहते कोई आरोप नहीं लगाया, लेकिन यह बात समझ से परे है कि उन्होंने बृजभूषण के साथ वर्षों तक 'सौहार्दपूर्ण रिश्ते' कैसे बनाए रखे और "उन्हें (बृजभूषण) पारिवारिक आयोजनों तथा विवाह समारोहों में बुलाया।

अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रह चुके बृजभूषण और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को विनेश फोगाट समेत छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में सबूतों की कमी के आधार पर तीन अगस्त को बरी कर दिया था। फैसले की प्रति अभी तक अदालत की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई है। इसमें 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के समक्ष दायर की गई शिकायतों का जिक्र किया गया है, जिन्हें अदालत ने 'काफी मिर्च-मसाला' लगाकर 'खास तौर पर तैयार की गई और शानदार ढंग से लिखी गई औपचारिक शिकायतें' बताया है। 

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