सीहोर (07 फरवरी 26)। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। उन्होंने अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। चौहान शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
कृषि मंत्री ने कहा कि देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 हजार रुपए प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस कलस्टर में अगर कोई दाल मिल शुरू करना चाहता है तो इसके लिए भारत सरकार 25 लाख रुपए का अनुदान देगी। किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए देशभर में 1000 दाल मिल खुलेंगी, जिसमें से 55 मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय राज्य सरकार के साथ है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है 'अन्न देवो भव:' हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है।