नईदिल्ली (09 फरवरी 25)। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल तक सरकार चलाने के बाद सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस इस बार के विधानसभा चुनाव में कुल 70 में से सिर्फ तीन सीटों पर ही अपनी जमानत बचा सकी और लगातार तीसरी बार चुनाव में उसका खाता तक नहीं खुला। यह बात जरूर है कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार अपनी वोट हिस्सेदारी में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है। उसने करीब 6.4 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उसे 4.26 प्रतिशत वोट मिले थे।
कांग्रेस ने अपने इस प्रदर्शन पर निराशा जताई और साथ ही कहा कि उसने 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और पांच साल बाद सत्ता में वापसी करेगी। कांग्रेस के जो तीन उम्मीदवार दिल्ली में अपनी जमानत बचाने में सफल रहे उनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव भी शामिल हैं, जिन्हें 40 हजार से अधिक मत और 27 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे। यदि किसी उम्मीदवार को डाले गए कुल वोटों का कम से कम छठा हिस्सा नहीं मिलता है तो जमानत स्वरूप उसके द्वारा निर्वाचन आयोग के समक्ष दी गई राशि जब्त हो जाती है। दिल्ली के कस्तूरबा नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक दत्त न सिर्फ अपनी जमानत बचाने में सफल रहे, बल्कि दूसरे स्थान पर भी रहे। यह दिल्ली की इकलौती सीट हैं जहां कांग्रेस दूसरे पर स्थान पर रही। दत्त ने 27019 वोट हासिल किए और उन्हें भाजपा उम्मीदवार नीरज बसोया से 11 हजार से अधिक मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें करीब 32 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
नांगलोई जाट तीसरी ऐसी सीट है जहां कांग्रेस जमानत बचाने में सफल रही। यहां से पार्टी के उम्मीदवार और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव रोहित चौधरी ने 31918 वोट और 20.1 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। वह तीसरे स्थान पर रहे। संदीप दीक्षित, अलका लांबा, कृष्णा तीरथ, मुदित अग्रवाल, हारून यूसुफ और राजेश लिलोठिया ऐसे नेता रहे जो अपनी जमानत बचाने में विफल रहे। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से चुनौती देने वाले पूर्व सांसद दीक्षित सिर्फ 4568 वोट हासिल कर सके और वह तीसरे स्थान पर रहे।