नईदिल्ली (06 सितंबर 26)। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार अपराह्न छात्रों के 'पीजी' के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत ढह गई, जिससे दो व्यक्ति की मौत हो गई जबकि कई लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं। हादसे पर अमित शाह ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता और पुलिस कमिश्रनर से बात की, साथ राहत बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 'साउथ कैंपस' के प्रमुख हिस्से के पास स्थित है और यहां की संकरी एवं भीड़भाड़ वाली गलियों में कई छात्रावास तथा भोजनालय हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत करीब 20 साल पुरानी थी और घटना के समय, अपराह्न करीब 1.30 बजे, बेसमेंट में निर्माण कार्य जारी था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में लाए गए चार घायलों में से दो की हालत अब भी गंभीर है, जबकि दो को मृत अवस्था में लाया गया था। एक बचावकर्मी को भी अस्पताल लाया गया था, जिसे उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिसकर्मी, दमकल विभाग, 'कैट' एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं मौके पर मौजूद हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है और बचाव एवं राहत अभियान जारी है।
पुलिस ने एक बयान में बताया कि अपराह्न 1.34 बजे साउथ कैंपस थाने में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत ढहने के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को सूचना मिली। बयान में कहा गया, 'मलबे में फंसे या घायल लोगों की सटीक संख्या फिलहाल ज्ञात नहीं है। अब तक कुछ लोगों को मलबे से निकाला गया गया है। पुष्टि होने पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी। पुलिस ने बताया कि उन्होंने इमारत के मालिक की पहचान कर ली है और उसे पकड़ने के लिए कई टीम गठित की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, ढही हुई इमारत को 'हॉस्टल डेज' के नाम से जाना जाता था। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अनुमान जताया कि 20 से अधिक लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, एक स्थानीय निवासी ने कहा, ''हॉस्टल हमेशा भरा रहता था। इसलिए मलबे में अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं। गलियां काफी संकरी और भीड़भाड़ वाली हैं, इसलिए बचाव वाहनों के लिए घटनास्थल पर जल्दी पहुंचना मुश्किल था।।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने तत्काल बचाव कार्य में मदद शुरू कर दी और मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए हाथों तथा उपलब्ध औजारों से मलबा हटाया। इस संबंध में एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि अगर यह घटना किसी कार्यदिवस पर हुई होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी, क्योंकि आसपास के कई छात्र घर गए हुए हैं। दिल्ली पुलिस के साथ काम करने वाले स्थानीय निवासी राजेन छेत्री ने बताया कि इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। छेत्री ने कहा, 'यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। वे प्रति बिस्तर करीब 12,000 रुपये किराया दे रहे थे।' उन्होंने कहा, 'मैं पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहा हूं। बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था। नींव भी बेहद कमजोर थी।' उन्होंने बताया कि करीब 13 लोगों को बचाया जा चुका है। दिल्ली में शुक्रवार से लगातार बारिश हो रही है।