Tuesday, 29 Sep 2026

दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, ट्रक से लाया जा रहा बिहार

पूर्वी चंपारण (17 दिसंबर 25)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस भव्य मंदिर में स्थापना के लिए 33 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग तैयार किया गया है, जिसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम से सड़क मार्ग के जरिए बिहार लाया जा रहा है। यह शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है और इसे तैयार करने में करीब दस साल का समय लगा है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में तराशा गया है। शिवलिंग को विशेष रूप से तैयार किए गए करीब 100 चक्कों वाले ट्रक के माध्यम से सड़क मार्ग से बिहार लाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह शिवलिंग पटना से लगभग 120 किलोमीटर दूर पूर्वी चंपारण जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, शिवलिंग को लेकर ट्रक जबलपुर से नागपुर होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) से गुजर रहा है। इस विशालकाय शिवलिंग को अत्यधिक सावधानी के साथ महज 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ले जाया जा रहा है। अनुमान है कि यह शिवलिंग करीब 20 दिनों में बिहार पहुंचेगा। इस शिवलिंग के निर्माण पर लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत आई है। नए साल में फरवरी महीने तक इसे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किए जाने की योजना है। तमिलनाडु से बिहार लाया जा रहा यह शिवलिंग करीब 210 मीट्रिक टन वजनी है। रास्ते में जिन-जिन राज्यों और शहरों से यह गुजर रहा है, वहां श्रद्धालुओं द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जा रहा है। इसे देश के किसी भी मंदिर में स्थापित होने वाला अब तक का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है। यह शिवलिंग काले ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। विराट रामायण मंदिर तीन मंजिला होगा, जिसमें इस विशाल शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। चेन्नई के पास महाबलीपुरम में लगभग 250 टन वजन के ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर की चट्टान को तराशकर मुख्य शिवलिंग के साथ सहस्रलिंगम भी बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि आठवीं शताब्दी के बाद भारत में सहस्रलिंगम का निर्माण नहीं हुआ था। शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट, गोलाई 33 फीट और वजन करीब 200 टन है, जो रामेश्वरम की स्थापत्य शैली की याद दिलाएगा।

विराट रामायण मंदिर का निर्माण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में केसरिया और चकिया के बीच जानकीनगर क्षेत्र में किया जा रहा है। यह स्थान पटना से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। मंदिर परिसर में चार आश्रम बनाए जाएंगे। चकिया में बन रहा यह विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद यह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मंदिर के निर्माण के बाद न सिर्फ बिहार और देश बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों से श्रद्धालु और पर्यटक इसकी भव्यता देखने के लिए यहां आएंगे। यह मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाएगा।

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