नईदिल्ली (13 अप्रैल 26)। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन में देरी करना करोड़ों महिलाओं के साथ न्याय में देरी करने के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल से राजनीति से ऊपर उठकर 'नारी शक्ति' के लिए 2029 तक इसके कार्यान्वयन का समर्थन करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे गए खरगे के पत्र के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि भारत की बेटियों से किए गए 'वादे को निभाने' का विषय है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पत्र में सरकार पर 'राजनीतिक लाभ' के लिए महिला आरक्षण कानून को जल्दबाजी में लागू करने का आरोप लगाया था।
रिजीजू ने कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लंबे समय से संजोई गई राष्ट्रीय आकांक्षा और वास्तव में राजनीतिक क्षेत्र के सभी दलों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने खरगे को लिखे पत्र में कहा, ''यह देश भर की महिलाओं से किए गए सामूहिक वादे को दर्शाता है।'' संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और सदन का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है) में संशोधन पेश किए जाएंगे ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके। हालांकि, खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना महिला कोटा कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना 'असंभव' होगा और मांग की है कि 29 अप्रैल को राज्य चुनावों का मौजूदा दौर समाप्त होने के बाद इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
रिजीजू ने 'एक्स' पर कहा, ''भारत की महिलाओं से किए गए वादे पर टालमटोल की राजनीति नहीं कर सकते। जब महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आया है, तो हिचकिचाहट है और सवाल उठाए जा रहे हैं। मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने कानून को वास्तविकता में बदल दिया है और अब परिसीमन से जुड़े आवश्यक संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए अहम हैं कि देश की महिलाओं को 2029 से पहले उचित प्रतिनिधित्व मिले और इसे अनिश्चितता के भंवर में और अधिक ना धकेलें। रिजीजू ने खरगे को भेजे गए पत्र में लिखा, ''यह राजनीति का विषय नहीं है। यह भारत की बेटियों से किए गए वादे को निभाने का विषय है।