नईदिल्ली (25 नवंबर 25)। भारत की न्यायपालिका के इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बन गए।
जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने का सफर प्रेरणादायक है। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। एक छोटे शहर से वकील के रूप में करियर की शुरुआत करते हुए, उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर ऊंचाइयों को छुआ। वे कई ऐतिहासिक संवैधानिक पीठों का हिस्सा रहे और राष्ट्रीय महत्व के मामलों पर अपने फैसलों से अलग पहचान बनाई। अब बतौर मुख्य न्यायाधीश, उनके पास लगभग 15 महीनों का कार्यकाल होगा। वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त होंगे। न्यायपालिका में सुधार और नई दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।
CJI की सैलरी- हर नए CJI के पदभार संभालने के साथ एक सवाल लोगों के मन में आता है देश के सबसे बड़े जज को सरकार की ओर से क्या सुविधाएं मिलती हैं और उनकी सैलरी कितनी होती है? मुख्य न्यायाधीश का पद बेहद जिम्मेदारी वाला है और उनके वेतन-भत्ते भी उसी स्तर के होते हैं। CJI को हर महीने 2,80,000 रुपये का मूल वेतन मिलता है। इसके अलावा, उन्हें 45,000 रुपये मासिक सत्कार भत्ता दिया जाता है, ताकि वे अपने पद के अनुरूप आधिकारिक मेहमानों का स्वागत कर सकें।मुख्य न्यायाधीश को घर की सजावट और रख-रखाव के लिए 10 लाख रुपये का फर्निशिंग भत्ता भी मिलता है। यह सुनिश्चित करता है कि उनका आवास हमेशा उच्च मानकों पर खरा उतरे।