नईदिल्ली (01 अगस्त 26)। देश में पायलट ट्रेनिंग को बढ़ावा देने के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने बड़ा फैसला लिया है। AAI ने फरवरी 2026 में शुरू किए गए ई-टेंडर के जरिए सात एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्लॉट के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है। इससे देश में पायलट बनाने की ट्रेनिंग क्षमता बढ़ेगी और विदेशी फ्लाइंग स्कूलों पर निर्भरता कम होगी। अनुमान है कि देश को भविष्य में 30 हजार से ज्यादा नए पायलटों की जरूरत पड़ सकती है।
टेक्निकल बिड 30 अप्रैल 2026 को और फाइनेंशियल बिड 22 मई 2026 को खोली गईं। AAI के दस्तावेज़ों के अनुसार, सभी साइट्स के लिए पूरी प्रक्रिया सफल रही है। भारत का सिविल एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ने वाला है; नागरिक उड्डयन मंत्रालय का अनुमान है कि अगले दशक में 30,000 से 31,800 अतिरिक्त पायलटों की ज़रूरत होगी। उम्मीद है कि भारतीय एयरलाइंस अगले पांच वर्षों में लगभग 500 और विमान शामिल करेंगी, जबकि एयरपोर्ट नेटवर्क में 50 और एयरपोर्ट जुड़ने का अनुमान है। फिलहाल, भारत में 63 फ्लाइंग बेस से 41 DGCA-मंजूरशुदा FTO काम कर रहे हैं (अप्रैल 2026 तक)। AAI के नोट में चेतावनी दी गई है कि अगर घरेलू ट्रेनिंग क्षमता का तेज़ी से विस्तार नहीं किया गया, तो बढ़ती मांग को टिकाऊ तरीके से पूरा नहीं किया जा सकेगा। 2021 में, पांच एयरपोर्ट्स पर नौ FTO स्लॉट दिए गए थे और 2022 में, पांच एयरपोर्ट्स पर छह और स्लॉट दिए गए थे। इसके अलावा, AAI बोर्ड ने FTO के विकास को बढ़ावा देने के लिए 20 एयरपोर्ट्स पर 25 वर्षों के लिए कार्ड रेट के आधार पर ज़मीन आवंटित करने को मंज़ूरी दी थी।