Sunday, 04 Oct 2026

देश में निष्पक्ष चुनाव आयोग हो: दिग्विजय सिंह

इंदौर (15 अप्रैल 25)। स्टेट प्रेस क्लब मप्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के समापन दिवस पर पहले सत्र के मुख्य वक्ता पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में एक ऐसा निष्पक्ष चुनाव आयोग बनना चाहिए, जो ईमानदारी के साथ कार्य कर सकें। वर्तमान में जो चुनाव आयोग हैं, उसकी भूमिका एक राजनीतिक दल का तरह होकर रह गई हैं, जो जनता के बजाय सरकार के प्रति अधिक जवाबदेह है। इस चुनाव आयोग ने लोकतंत्र पर कब्जा कर रखा है, जो विपक्षी दलों को लगातार अनसुना कर रहा हैं। सिंह ने कहा कि चुनाव के दोरान प्रयुक्त होने वाली ईवीएम मशीन पर मेरा विश्वास नहीं हैं। देश में चुनाव मतपत्र और मतपेटियों के द्वारा होना चाहिए। कई देशों में चुनाव इसी तरीके से हो रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका की ट्रम्प सरकार भी ईवीएम के पक्ष में नहीं हैं। यहीं बात एलन मस्क, तुलसी ने भी कही है। सिंह ने कहा कि ईवीएम  मशीन को मेन्युपुलैट भी किया जा सकता हैं। वीवीपैट से भी पता नहीं चलता कि वोट किसे मिला हैं। ईवीएम में डाला गया साफ्टवेयर का संपर्क किससे हैं, इसकी जानकारी भी सबको नहीं होती है। 

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्कूल कमजोर होता है तो स्टूडेंट भी कमजोर हो जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक काम की मैं हमेशा प्रशंसा करता हूं, 74वें संशोधन में नगरीय निकाय पंचायत राज के लिए। भारत दुनिया का ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जिसकी जनसंख्या अधिक है। चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम कर रहा है और वह इलेक्ट्रानिक मशीन को लेकर समय-समय पर जवाब देता है। हमें सिस्टम पर विश्वास करना होगा। अपने कार्यकर्ता, कैडर पर विश्वास करना होगा। सिस्टम पर विश्वास नहीं रखेंगे तो कई सारे प्रश्न खड़े होंगे। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के वक्त प्रेस की आजादी वाला माहौल था। आज तो पत्रकार तीखे सवाल भी नहीं कर सकते है। भारत में नेशनल मीडिया पॉलिसी नहीं है। इस पर हम काम करना चाहते हैं। टीवी पत्रकार एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह ने कहा कि मैं तो साथ आ गई हूं। मुझे उपन्यास, कविता पढ़ना अच्छा लगता था। गुरु ने कहा था अपनी आंख, नाक, कान खोलकर रखना। नई पीढ़ी को सीख देने वाले लोग अब नहीं है। अब समझौतावादी पत्रकारिता देखकर रोष होता है। एआई सहित नई चीजें आती रहेंगी। टेक्नालॉजी का उपयोग करें, पर अपनी जिम्मेदारी भी नहीं भूलें। पत्रकारों की बौद्धिकता को कोई एआई चुनौती नहीं दे सकता। 

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